क्या भारत के फैसले से पाकिस्तान पर मंडरा रहा सबसे बड़ा जल संकट?

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा सिंधु जल संधि निलंबित किए जाने से पाकिस्तान की चिंता बढ़ गई है। पहले से जल संकट झेल रहा पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने में भी सफल नहीं हुआ। ऐसे में सवाल है कि क्या पानी की कमी उसकी कृषि, अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा संकट खड़ा कर सकती है?

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 4 July 2026, 8:13 AM IST
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New Delhi: भारत द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने से भारत-पाकिस्तान के बीच जल विवाद फिर चर्चा में है। पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के फैसले का विरोध कर रहा है, लेकिन भारत अपने रुख पर कायम है। इस बीच पाकिस्तान के नेताओं के तीखे बयानों ने दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ा दिया है।

क्या है सिंधु जल संधि?

सिंधु जल संधि पर 19 सितंबर 1960 को कराची में भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षर हुए थे। विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुए इस समझौते पर भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने हस्ताक्षर किए थे। संधि के तहत सिंधु नदी प्रणाली के जल का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा पाकिस्तान और 20 प्रतिशत हिस्सा भारत के उपयोग के लिए निर्धारित किया गया।

भारत ने संधि क्यों निलंबित की?

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए। इन्हीं में सिंधु जल संधि को निलंबित करना भी शामिल था। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा-पार आतंकवाद पर विश्वसनीय और स्थायी कार्रवाई नहीं करता, तब तक यह फैसला जारी रहेगा। विदेश मंत्रालय ने भी दोहराया है कि आतंकवाद और सामान्य द्विपक्षीय संबंध साथ-साथ नहीं चल सकते।

पाकिस्तान की बढ़ती बेचैनी की वजह

भारत के फैसले के बाद पाकिस्तान ने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी बात रखने की कोशिश की, लेकिन उसे अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। पाकिस्तान के कई वरिष्ठ नेताओं ने भारत को चेतावनी भरे बयान दिए हैं। हालांकि भारत ने इन बयानों को खारिज करते हुए कहा है कि पाकिस्तान पहले आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद करे।

पाकिस्तान में जल संकट कितना गंभीर है?

पाकिस्तान पहले से ही गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। सिंध और बलूचिस्तान के कई क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। सुक्कुर बैराज में पानी की कमी से नहरों में जल स्तर तेजी से घटा है, जिससे कृषि उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो खाद्य सुरक्षा, बिजली उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है।

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क्या पाकिस्तान के भीतर भी बढ़ रहा है विवाद?

जल संकट के कारण पाकिस्तान के प्रांतों के बीच भी तनाव बढ़ रहा है। सिंध सरकार ने पंजाब पर अपने हिस्से से अधिक पानी लेने का आरोप लगाया है। पानी के बंटवारे को लेकर बढ़ते मतभेद भविष्य में राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियों को और गंभीर बना सकते हैं।

Location :  New Delhi

Published :  4 July 2026, 8:13 AM IST

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