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गोरखपुर के गोला थाना क्षेत्र से नाबालिग किशोरी के कथित अपहरण के मामले में परिवार ने जिलाधिकारी के सामने गुहार लगाई। पांच सप्ताह बाद भी बरामदगी न होने पर डीएम ने पुलिस को 48 घंटे में प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
डीएम से मिला पीड़ित परिवार
Gorakhpur: गोरखपुर में एक नाबालिग किशोरी के लापता होने का मामला अब प्रशासन के दरवाजे तक पहुंच गया है। गोला तहसील के औचक निरीक्षण पर पहुंचे जिलाधिकारी दीपक मीणा के सामने शुक्रवार को एक पीड़ित परिवार फूट-फूटकर रो पड़ा। भाई ने अपनी नाबालिग बहन की सकुशल बरामदगी की गुहार लगाई तो वहां मौजूद अधिकारियों के बीच भी सन्नाटा छा गया। मामला गोला थाना क्षेत्र के बरईपूरा उर्फ पड़ौली गांव का है, जहां से 15 जनवरी को किशोरी के कथित अपहरण की बात सामने आई थी।
गोरखपुर जिले के इस मामले में परिजनों का आरोप है कि गांव के ही एक युवक ने शादी का झांसा देकर नाबालिग को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। परिवार का यह भी दावा है कि इस घटना में दो अन्य लोगों की भूमिका रही है। सूचना मिलते ही गोला थाने में पॉक्सो एक्ट, अपहरण और साजिश की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया, लेकिन पांच सप्ताह बीत जाने के बाद भी किशोरी की बरामदगी नहीं हो सकी है।
पीड़ित भाई का कहना है कि वह लगातार थाने के चक्कर काट रहा है, मगर हर बार “जांच जारी है” कहकर टाल दिया जाता है। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्य आरोपी गांव में खुलेआम घूम रहा है और उन्हें धमकी दे रहा है, जिससे वे डर और तनाव में जीने को मजबूर हैं।
निरीक्षण के दौरान जब युवक ने डीएम के सामने अपनी बात रखी तो वह भावुक हो गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी दीपक मीणा ने मौके पर ही संबंधित पुलिस अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने साफ कहा कि नाबालिग की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और 48 घंटे के भीतर प्रभावी प्रगति दिखनी चाहिए।
डीएम ने यह भी चेतावनी दी कि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उधर, ग्रामीणों ने भी प्रशासन से निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई की मांग की है।