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यूपी में मनरेगा घोटाला (सोर्स- डाइनामाइट न्यूज़)
Lucknow: उत्तर प्रदेश में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है। वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2025-26 के बीच किए गए सोशल ऑडिट में कुल 24,426 कार्यों में 76 करोड़ 50 लाख 60 हजार 64 रुपये के गबन का खुलासा हुआ। हालांकि, दो स्तर की जांच के बाद यह राशि घटकर 13 करोड़ 74 लाख 25 हजार 158 रुपये तक सीमित रह गई।
जांच रिपोर्ट में वर्ष 2020-21 को कोरोना महामारी के कारण शामिल नहीं किया गया। इसके अलावा वर्ष 2014-15 से 2016-17 तक की ऑनलाइन रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं का विवरण शून्य दर्शाया गया, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। इससे सिस्टम की पारदर्शिता पर भी चर्चा शुरू हो गई है।
प्राथमिक जांच में 5,025 मामलों में 27 करोड़ 84 लाख 23 हजार 811 रुपये की कटौती कर दी गई। इसके बाद 19,401 मामलों में 48 करोड़ 66 लाख 36 हजार 946 रुपये के गबन की पुष्टि हुई। अंतिम जांच के बाद 10,816 मामलों में 34 करोड़ 92 लाख 11 हजार 788 रुपये और कम कर दिए गए, जिससे कुल राशि घटकर 13.74 करोड़ रुपये रह गई।
अब तक 8,476 मामलों में 13 करोड़ 46 लाख 70 हजार 952 रुपये की वसूली की जा चुकी है। जबकि 107 मामलों में 27 लाख 54 हजार 206 रुपये की राशि अभी भी वसूली के दायरे से बाहर है। अधिकारियों के अनुसार, शेष राशि की वसूली के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
अंतिम जांच के बाद कई जिलों में गबन की पुष्टि हुई है-
अंबेडकरनगर: 6.80 लाख
अमेठी: 10.45 लाख
अयोध्या: 4.85 लाख
बहराइच: 4.09 लाख
बलरामपुर: 12 हजार
बाराबंकी: 2.78 लाख
गोंडा: 8.42 लाख
हरदोई: 31.53 लाख
खीरी: 21.22 लाख
लखनऊ: 3.31 लाख
रायबरेली: 17.55 लाख
श्रावस्ती: 13.47 लाख
सीतापुर: 17.75 लाख
सुलतानपुर: 8.20 लाख रुपये
जिला विकास अधिकारी आलोकदत्त उपाध्याय ने बताया कि मनरेगा में दो प्रकार की अनियमितताएं पाई जाती हैं नियमों की अनदेखी और गबन। जांच के बाद गबन की पुष्टि कर वसूली की प्रक्रिया की जाती है। उन्होंने कहा कि शेष बकाया राशि की वसूली जल्द पूरी की जाएगी।
इस बड़े खुलासे के बाद मनरेगा योजनाओं की निगरानी और सख्त किए जाने के संकेत मिले हैं। प्रशासन का दावा है कि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग और पारदर्शिता बढ़ाई जाएगी।
Location : Lucknow
Published : 26 April 2026, 4:42 PM IST