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मनरेगा (प्रतीकात्मक छवि)
महराजगंज: जनपद के विकास भवन स्थित मनरेगा कार्यालय में पिछले 19 वर्षों से तैनात वरिष्ठ लिपिक (बाबू) शमीउद्दीन अंसारी का तबादला आखिरकार गोरखपुर कर दिया गया है। लेकिन उन्हें फिलहाल यहां से रिलीव नहीं किया जाएगा। तबादले के बावजूद रिलीविंग न होने की मुख्य वजह यह बताई जा रही है कि कार्यालय में उनके स्थान पर किसी अन्य कर्मचारी की नियुक्ति अभी नहीं हो सकी है। प्रशासन ने निर्णय लिया है कि जब तक नई तैनाती नहीं हो जाती, तब तक शमीउद्दीन अंसारी महराजगंज में ही अपनी सेवाएं देते रहेंगे।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार शमीउद्दीन अंसारी की तैनाती और कार्यशैली को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। आरोप है कि उन्होंने शासन स्तर से जारी निर्देशों और वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की महीनों तक अनदेखी की। यही नहीं, एक ही पद पर लगातार 19 वर्षों तक जमे रहने को भी नियम विरुद्ध माना जा रहा है। इसी को आधार बनाते हुए उनके खिलाफ हाल ही में एक गंभीर शिकायत दर्ज की गई, जिसकी जांच आयुक्त ग्राम्य विकास उत्तर प्रदेश के निर्देश पर कराई जा रही है।
डाइनामाइट न्यूज संवाददाता को प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस शिकायत की जांच 22 व 23 मई 2025 को महराजगंज में की गई, जिसमें मनरेगा के अंतर्गत कराए जा रहे कार्यों की गहन समीक्षा एवं स्थलीय निरीक्षण भी प्रस्तावित था। जांच अधिकारी को निर्देश दिए गए थे कि वे संबंधित अभिलेखों सहित सभी अधिकारियों व अभियंताओं की उपस्थिति सुनिश्चित कर जांच कार्यवाही संपन्न कराएं।
इस पूरे मामले को लेकर विकास भवन में हलचल का माहौल है। विभागीय सूत्रों का मानना है कि इतने वर्षों तक एक ही स्थान पर तैनाती और आदेशों की अवहेलना, दोनों ही शासन के नियमों के खिलाफ हैं। वहीं कुछ लोगों का यह भी कहना है कि शमीउद्दीन अंसारी को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था, जिसके चलते वे इतने वर्षों तक बिना रुकावट यहीं बने रहे।
Location : Maharajganj
Published : 16 June 2025, 6:00 PM IST
Topics : clerk Investigation Maharajganj MNREGA transfer