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महराजगंज के विकास भवन में एक बर्खास्त कर्मचारी ने असलहे के दम पर उपायुक्त पर हमला कर दिया, जिससे अफरा-तफरी मच गई। वेतन विवाद को लेकर हुए इस हमले में अधिकारी घायल हो गए और आरोपी फरार हो गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए हैं।
महराजगंज विकास भवन
Maharajganj: जनपद के विकास भवन स्थित श्रम-रोजगार कार्यालय में बुधवार शाम उस समय सनसनी फैल गई, जब एक बर्खास्त कर्मचारी ने असलहे के साथ कार्यालय में घुसकर उपायुक्त (श्रम-रोजगार) पर हमला कर दिया। घटना के बाद पूरे परिसर में हड़कंप मच गया और कर्मचारियों में दहशत का माहौल बन गया।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, उपायुक्त (श्रम-रोजगार) गौरवेन्द्र सिंह अपने कार्यालय में नियमित शासकीय कार्यों का निर्वहन कर रहे थे। इसी दौरान शाम को अरविन्द कुमार श्रीवास्तव, जो पहले मनरेगा में तकनीकी सहायक के पद पर घुघुली ब्लाक में तैनात था और अब बर्खास्त हो चुका है, वो अचानक कार्यालय पहुंचा। आते ही उसने अपने दो वर्षों के वेतन की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया।
इस पर गौरवेन्द्र सिंह ने उसे स्पष्ट किया कि उसने तथ्यों को छिपाकर मानदेय प्राप्त किया था, जिसके चलते उसके खिलाफ रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) जारी की गई है। साथ ही यह भी बताया गया कि मामला इलाहाबाद उच्च न्यायालय में विचाराधीन है और न्यायालय के आदेश के अनुसार ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इतना सुनते ही आरोपी भड़क उठा और गाली-गलौज करते हुए अचानक हमला कर दिया। उसने मारपीट करते हुए उपायुक्त को घायल कर दिया। हमले में गौरवेन्द्र सिंह के दाहिने हाथ की दो उंगलियां चोटिल हो गईं, जबकि पेट और चेहरे पर भी गंभीर चोटें आईं। इतना ही नहीं, आरोपी ने कार्यालय में रखी कई महत्वपूर्ण शासकीय फाइलें भी फाड़ दीं।
घटना के दौरान आरोपी के पास लाइसेंसी पिस्टल भी मौजूद थी, जिससे स्थिति और भयावह हो गई। हंगामा और शोर सुनकर अन्य कर्मचारी मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक आरोपी मौके से फरार हो गया। जाते-जाते उसने अधिकारी को जान से मारने की धमकी भी दी।
घटना के बाद पीड़ित अधिकारी ने तत्काल कोतवाली थाने में तहरीर दी। सदर कोतवाल निर्भय कुमार सिंह के अनुसार, आरोपी के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं, 115(2), 352, 351(3), 224(2) और 132 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है और मामले की जांच जारी है।
इस घटना ने सरकारी दफ्तरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खुलेआम हथियार लेकर कार्यालय में घुसकर अधिकारी पर हमला करना सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी चूक माना जा रहा है। प्रशासन अब इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए आगे की कार्रवाई में जुट गया है।