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गोरखपुर के गोला स्थित बारानगर बीर कालिका माता मंदिर में चैत्र नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। सरयू नदी के किनारे स्थित इस प्राचीन मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां मांगी हर मुराद पूरी होती है। मंदिर से जुड़ी चमत्कारी कथा और सिद्ध पीठ के रूप में इसकी पहचान श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।
कालिका माता मंदिर (Img: Internet)
Gorakhpur: गोरखपुर के दक्षिणांचल स्थित गोला तहसील का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल बारानगर बीर कालिका माता मंदिर इन दिनों चैत्र नवरात्र को लेकर श्रद्धा और भक्ति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। सरयू नदी के तट पर स्थित इस प्राचीन मंदिर में नवरात्र ही नहीं, बल्कि वर्ष भर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती रहती है। घड़ी-घंटों और करतल ध्वनि से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहता है।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, मान्यता है कि सच्चे मन और श्रद्धा से मां के दरबार में आने वाले हर भक्त की मनोकामना पूर्ण होती है। यही कारण है कि यह स्थल न केवल गोरखपुर, बल्कि आसपास के कई जनपदों के लोगों के लिए आस्था का केंद्र बन चुका है। नवरात्र और प्रत्येक रविवार को यहां श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ता है, जहां मुंडन, कथा, कड़ाही जैसे धार्मिक अनुष्ठान भी संपन्न कराए जाते हैं।
मंदिर के इतिहास को लेकर भी रोचक किवदंती प्रचलित है। बताया जाता है कि वर्षों पहले सरयू नदी की धारा गांव से दूर बहती थी। एक दिन नाविकों को नदी में एक पिंड बहता हुआ दिखाई दिया, जिसे वे गांव में ले आए और स्थापित कर दिया। इसके बाद नाविकों को नदी पार कराने में कठिनाई होने लगी। तभी शिवमंगल मल्लाह को स्वप्न में माता ने दूसरे स्थान पर स्थापित होने का संकेत दिया। इसके बाद पिंड को गांव के बाहर स्थापित किया गया और आश्चर्यजनक रूप से सरयू नदी की धारा मंदिर के पास से बहने लगी, जिससे नाविकों की समस्या भी समाप्त हो गई।
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समय के साथ यह स्थान एक सिद्ध पीठ के रूप में विकसित हुआ। यहां फलाहारी संत बाबा बोधी दास ने तपस्या कर मंदिर परिसर को विकसित किया तथा धर्मशाला और हनुमान मंदिर का निर्माण कराया। आज भी उनकी समाधि यहां स्थित है, जो श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र है।
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मंदिर की देखरेख स्थानीय मल्लाह समाज द्वारा की जाती है। हालांकि, नवरात्र और विशेष अवसरों पर भारी भीड़ के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था की कमी बनी रहती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से कई बार पुलिस व्यवस्था की मांग की है, लेकिन अब तक इस दिशा में ठोस पहल नहीं हो सकी है। इसके बावजूद, मां बीर कालिका के दरबार में पहुंचने वाला हर श्रद्धालु खुद को धन्य महसूस करता है और मन में अटूट विश्वास लेकर लौटता है।