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महराजगंज में अनूप पब्लिक स्कूल के प्रबंधक अनूप चौधरी का 40 वर्ष की आयु में निधन हो गया। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। कोचिंग सेंटर से विद्यालय तक का उनका सफर प्रेरणादायक रहा। उनके निधन से शिक्षा जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
मृतक अनूप चौधरी (फाइल फोटो)
Maharajganj: महराजगंज जनपद में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अनूप पब्लिक स्कूल के प्रबंधक अनूप चौधरी का गुरुवार सुबह लगभग 40 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके असामयिक निधन की खबर फैलते ही शिक्षा जगत, सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों में गहरा शोक व्याप्त हो गया। हर कोई इस खबर से स्तब्ध नजर आया।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, परिजनों ने बताया कि अनूप चौधरी फरेंदा नगर के निवासी थे। वे चार भाइयों में सबसे बड़े थे और बचपन से ही शिक्षा के क्षेत्र में कुछ नया और सार्थक करने की सोच रखते थे। उन्होंने अपने जीवन के करीब 20 वर्ष शिक्षा के क्षेत्र को समर्पित किए और इसे केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि समाज निर्माण का माध्यम माना।
अनूप चौधरी ने अपने शिक्षण कार्य की शुरुआत फरेंदा नगर में एक कोचिंग सेंटर के माध्यम से की थी। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन दिया। उनकी मेहनत और लगन का परिणाम रहा कि समय के साथ उनका कोचिंग सेंटर क्षेत्र में पहचान बनाने लगा। बाद में उन्होंने महराजगंज में अनूप पब्लिक स्कूल की स्थापना की, जिसने सैकड़ों छात्र-छात्राओं के भविष्य को दिशा दी।
अनूप चौधरी का मानना था कि शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि बच्चों के चरित्र निर्माण और आत्मविश्वास को भी मजबूत करना चाहिए। उनके मार्गदर्शन में कई छात्र विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और शैक्षणिक क्षेत्रों में सफल हुए। शिक्षक, अभिभावक और छात्र उन्हें एक कुशल प्रशासक के साथ-साथ एक मार्गदर्शक के रूप में याद करते हैं।
बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत खराब चल रही थी। बुधवार रात अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने पर परिजन उन्हें इलाज के लिए गोरखपुर के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां गुरुवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
उनके निधन की सूचना मिलते ही विद्यालय परिवार, शिक्षक, छात्र, अभिभावक और क्षेत्र के गणमान्य लोग अस्पताल और उनके आवास पर पहुंचने लगे। सभी ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उनका अंतिम संस्कार कैंपियरगंज स्थित कर्मौनी घाट पर किया गया, जहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।