हिंदी
कोर्ट में आरोपी ने दी सफाई (IMG: Dynamite News)
Sitapur: सीतापुर में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए साफ कर दिया कि पॉक्सो कानून के तहत नाबालिग की कथित सहमति अपराध से बचने का आधार नहीं बन सकती। कमलापुर थाना क्षेत्र के इस मामले में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट की अदालत ने कुशेन्द्र पुत्र रामनरेश को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
अभियोजन के मुताबिक घटना 24 फरवरी 2020 की है। उस दिन 14 वर्षीय किशोरी अपने घर से निकली थी, लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी वापस नहीं लौटी। किशोरी के घर नहीं पहुंचने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। परिजन रात में उसकी खोज करते हुए आरोपी के घर तक पहुंचे। वहां किशोरी मिली। अभियोजन के अनुसार, पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया था।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपी ने खुद को निर्दोष बताया। बचाव पक्ष की ओर से यह दलील दी गई कि आरोपी और पीड़िता के बीच प्रेम संबंध थे और किशोरी अपनी इच्छा से उसके घर आई थी। आरोपी की ओर से यह भी कहा गया कि दोनों के बीच सहमति से संबंध बने थे। साथ ही परिवार पर दबाव डालकर मुकदमा दर्ज कराने का आरोप लगाया गया।
अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता के बयान के साथ उसके स्वजन और अन्य गवाहों की गवाही का भी परीक्षण किया। इसके अलावा पुलिस की विवेचना, चिकित्सीय दस्तावेज और विधि विज्ञान प्रयोगशाला यानी एफएसएल की रिपोर्ट को भी साक्ष्यों में शामिल किया गया। एफएसएल रिपोर्ट को इस मामले में अभियोजन के लिए महत्वपूर्ण माना गया। रिपोर्ट में पीड़िता के कपड़ों पर आरोपी से संबंधित जैविक पदार्थ मिलने की बात सामने आई।
मामले में आरोपी पर सिर्फ दुष्कर्म ही नहीं, बल्कि पीड़िता को धमकाने का भी आरोप था। अभियोजन ने आरोप लगाया था कि घटना के बारे में किसी को बताने पर आरोपी ने पीड़िता को जान से मारने की धमकी दी थी। अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपी को दुष्कर्म और धमकी के आरोपों में दोषी माना। बचाव पक्ष की ओर से ऐसा कोई विश्वसनीय साक्ष्य पेश नहीं किया जा सका, जिससे अभियोजन के मामले पर गंभीर संदेह पैदा हो।
अदालत ने कुशेन्द्र को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और 506 के साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 3/4 के तहत दोषी ठहराया। फैसला सुनाते हुए अदालत ने अपराध की गंभीरता और मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखा। इसके बाद आरोपी को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। साथ ही 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।
वर्ष 2020 में दर्ज हुए इस मुकदमे की सुनवाई पूरी होने के बाद अब अदालत ने अपना फैसला सुनाया है। सजा तय करते समय अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के जमील बनाम स्टेट ऑफ यूपी मामले में प्रतिपादित सिद्धांत का भी उल्लेख किया। इस फैसले का एक अहम पहलू यह रहा कि अदालत ने नाबालिग के साथ यौन संबंध के मामले में आरोपी की ओर से दी गई प्रेम संबंध और सहमति की दलील को स्वीकार नहीं किया।
Location : Sitapur
Published : 21 August 2026, 7:55 PM IST