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Kanpur: कानपुर के घंटाघर इलाके की भीड़ और भागदौड़ के बीच एक ऐसा मंदिर मौजूद है, जिसे पहली नजर में देखकर शायद ही कोई अंदाजा लगा पाए कि यह मंदिर है। बाहर से यह किसी सामान्य तीन मंजिला मकान जैसा दिखाई देता है, लेकिन अंदर प्रवेश करते ही भगवान गणेश की भक्ति और इतिहास की एक अलग दुनिया सामने आती है। घंटाघर स्थित श्री सिद्धिविनायक गणेश मंदिर करीब एक सदी पुराने धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के स्थल के रूप में जाना जाता है।
मंदिर की कहानी ब्रिटिश शासन के दौर से जुड़ी बताई जाती है। उस समय इस इलाके में मंदिर निर्माण को लेकर अंग्रेजी हुकूमत की ओर से आपत्ति जताई गई थी। ऐसे में भक्तों और समाजसेवियों ने ऐसा रास्ता निकाला कि बाहर से इमारत सामान्य मकान जैसी नजर आए और अंग्रेजी अधिकारियों को इसकी असली पहचान का पता न चले। इसी वजह से आज भी इसका बाहरी स्वरूप दूसरे मंदिरों से बिल्कुल अलग दिखाई देता है।
कानपुर के इस सिद्धिविनायक मंदिर की कहानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक से भी जुड़ी है। बताया जाता है कि तिलक के कानपुर आने के दौरान मंदिर के निर्माण के लिए भूमि पूजन कराया गया था। हालांकि ब्रिटिश शासन के कारण उस समय मूर्ति स्थापना का काम पूरा नहीं हो सका। बाद में निर्माण पूरा होने के बाद मंदिर की ऊपरी मंजिल पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई।
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मंदिर के निर्माण को महाराष्ट्र की गणेश भक्ति और सार्वजनिक गणेश उत्सव की परंपरा से भी जोड़कर देखा जाता है। कानपुर में गणेश महोत्सव को सार्वजनिक रूप से आगे बढ़ाने में इस मंदिर की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जाती है। वर्ष 1918 में भूमिपूजन किया गया था 1921 में मंदिर बनकर तैयार हो गया था, तभी से यहां गणेश महोत्सव मनाए जाने का उल्लेख मिलता है, मंदिर के मुख्य धर्मकर्ता सर्वराकार सुधीर गुप्ता बताते हैं, हमारे पूर्वज बताते थे कि इस जगह पर क्रांतिकारियों की मीटिंग होती थ।
अंग्रेज तो मंदिर बनने ही नहीं दे रहे थे, तब महाराष्ट्र कमेटी के लोग कई जगह दौड़े और अंग्रेजो को आश्वस्त किया कि हम मंदिर नहीं मकान बनाएंगे, तभी यह स्वरूप मंदिर का मकान जैसा दिखता है। यह मंदिर 5 तल का है. ग्राउंड फ्लोर पर मूर्ति नहीं है, प्रथम तल से ऊपर तक भगवान के अलग-अलग स्वरूप के साथ अष्ट विग्रह भी है।
मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इसकी संरचना और यहां स्थापित भगवान गणेश के अलग-अलग स्वरूप हैं। अलग-अलग मंजिलों पर गणपति के विविध रूपों के दर्शन होते हैं। संगमरमर और पीतल से बनी प्रतिमाएं मंदिर की खूबसूरती को और बढ़ाती हैं। खास तौर पर गणेश जी के अनेक स्वरूप जैसे विराट स्वरूप श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
कहा जाता है कि यहां दूर-दूर से भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु गणपति के दर्शन के साथ अपनी मनोकामनाएं भी मांगते हैं। मुख्य द्वार के पास विराजमान मूषक राज भी हैं।
घंटाघर जैसे व्यस्त इलाके में खड़ा यह मंदिर सिर्फ पूजा का स्थान नहीं, बल्कि कानपुर के पुराने सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास की भी एक झलक देता है। जिस दौर में धार्मिक गतिविधियों पर अंग्रेजी शासन की निगाहें थीं, उसी दौर में मकाननुमा ढांचे के भीतर गणपति की भक्ति को जगह मिलना इसकी कहानी को और खास बनाता है।
यही वजह है कि घंटाघर का यह सिद्धिविनायक मंदिर कानपुर की उन विरासतों में शामिल है, जहां आस्था के साथ इतिहास भी सांस लेता हुआ नजर आता है।
Location : Kanpur
Published : 14 September 2026, 10:58 AM IST