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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी एक साल बाकी है, लेकिन राजनीतिक हलचल अभी भी तेज़ है। असदुद्दीन ओवैसी उत्तर प्रदेश में गठबंधन के लिए बेताब हैं, लेकिन किसी भी पार्टी से उनका समझौता नहीं हो पा रहा है। BSP चीफ मायावती के अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान करने के बाद, ओवैसी के पास क्या ऑप्शन बचे हैं?
असदुद्दीन ओवैसी उत्तर प्रदेश में गठबंधन के लिए बेताब?
Lucknow: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी एक साल बाकी है, लेकिन राजनीतिक हलचल अभी भी तेज़ है। AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी उत्तर प्रदेश में गठबंधन के लिए बेताब हैं, लेकिन किसी भी पार्टी से उनका समझौता नहीं हो पा रहा है। BSP चीफ मायावती के अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान करने के बाद अब ओवैसी को सोचना है कि आखिर गठबंधन के लिए उनके पास और कौन से विकल्प हो सकते हैं?
मुस्लिम पॉलिटिक्स को बहाने से असदुद्दीन ओवैसी अपनी पार्टी AIMIM को हैदराबाद के चारमीनार से नेशनल लेवल पर लाने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। इस मिशन के तहत ओवैसी उत्तर प्रदेश की पॉलिटिक्स में खुद को एक ट्रंप कार्ड के तौर पर स्थापित करना चाहते हैं। हालांकि, हैदराबादी बिरयानी हमेशा अवध पुलाव के सामने फीकी रही है। इसका तीखापन, मसाले और कच्चापन अवध के लोगों को कभी पसंद नहीं आया।
उत्तर प्रदेश की पॉलिटिक्स इतनी उलझी हुई हो सकती है कि सबसे अनुभवी नेता भी धोखा खा सकते हैं। 2017 और 2022 के चुनावों में अपनी पूरी कोशिशों के बावजूद असदुद्दीन ओवैसी कोई भी राजनीतिक करिश्मा दिखाने में नाकाम रहे। यही वजह है कि ओवैसी 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए उत्तर प्रदेश में एक सपोर्ट सिस्टम की तलाश कर रहे हैं जो उन्हें अपनी राजनीतिक पकड़ बनाने में मदद करेगा।
ओवैसी BJP के साथ गठबंधन नहीं कर सकते और समाजवादी पार्टी और कांग्रेस उनके साथ आने को तैयार नहीं हैं इसलिए असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में BSP के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ने पर विचार किया, लेकिन मायावती ने अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा करके उनकी राजनीतिक योजनाओं को विफल कर दिया है। इस प्रकार ओवैसी उत्तर प्रदेश की राजनीतिक भूलभुलैया में खुद को अकेला पाते हैं। अब सवाल यह है कि ओवैसी किसके साथ गठबंधन करेंगे?
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