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कॉल सेंटर (Img : pinterest)
क्राइम ब्रांच और साइबर क्राइम ब्रांच ने सोमवार रात जाजमऊ के केडीए चौराहा स्थित जमजम अपार्टमेंट में चल रहे कॉल सेंटर पर छापा मारा। मौके से मैनेजर अब्दुल वाहिब समेत चार युवतियां और सात युवक मिले। पूछताछ में सामने आया कि कर्मचारियों को करीब डेढ़ महीने की ट्रेनिंग दी जाती थी। उन्हें बातचीत के लिए दो पन्नों की स्क्रिप्ट दी जाती थी, ताकि यूके के लोगों से बात करते समय कहीं कोई गलती न हो।
पुलिस के मुताबिक, कॉल सेंटर इंटरनिटी डिजी इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड के नेतृत्व में चल रहा था। इसका मुख्यालय लखनऊ के विभूति खंड में बताया गया है। कंपनी से जुड़े युवराज शुक्ला के बारे में भी पुलिस जानकारी जुटा रही है।
कॉल सेंटर के कर्मचारी फोन पर सबसे पहले पूछते थे, ‘हैलो, हैव यू इन डेब्ट?’ यानी क्या आप कर्ज में हैं। सामने से हां मिलते ही खुद को सीआईडी से डेटा मिलने की बात कहते थे। इसके बाद लोन सेटलमेंट और आईवीए-एचडीआर जैसी सेवाओं के नाम पर कम किस्त में कर्ज चुकाने का भरोसा दिलाया जाता था।
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जाल में फंसने वाले व्यक्ति से पहले फीस मांगी जाती थी। मामला तैयार होने पर कॉल लखनऊ में बैठे युवराज शुक्ला को ट्रांसफर कर दी जाती थी। इसके बाद फीस और किस्तों के नाम पर रकम वसूली जाती थी।
साइबर थाना प्रभारी अभय सिंह के मुताबिक, आरोपियों ने अपनी पहचान और कॉल की लोकेशन छिपाने के लिए क्लाउड कॉलिंग और वीसी डायलिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया। एक कर्मचारी को रोजाना करीब 250 से 300 कॉल करने का टारगेट दिया जाता था। कर्मचारियों की ऑनलाइन एक्सेल शीट में हाजिरी और काम का रिकॉर्ड रखा जाता था।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि पकड़े गए कई कर्मचारी पहले बंद हो चुके कॉल सेंटरों में काम कर चुके हैं। मैनेजर अब्दुल वाहिब भी पहले निफ्टेल और सैफ जेडए कनेक्ट जैसे कॉल सेंटरों में काम कर चुका है। साइबर क्राइम ब्रांच ने अब्दुल वाहिब, युवराज शुक्ला और इंटरनिटी डिजी इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क ने अब तक यूके के कितने लोगों को ठगा और पाउंड-डॉलर के रूप में कितनी रकम वसूली।
Location : Kanpur
Published : 9 September 2026, 3:34 PM IST