मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तान का दावा निकला झूठा? तालिबान के एक बयान ने खोल दिया बड़ा राज

मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तान के पुराने दावे पर तालिबान के ताजा बयान ने सवाल खड़े कर दिए हैं। अफगान विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख अफगानिस्तान में नहीं है। इससे पाकिस्तान की उस दलील को झटका लगा है, जिसमें अजहर के अफगानिस्तान में छिपे होने का दावा किया जाता रहा है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 9 September 2026, 3:19 PM IST
google-preferred

New Delhi: मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तान लंबे समय से एक ही दावा करता रहा है कि जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक अफगानिस्तान में छिपा हुआ है। अब तालिबान सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के बयान ने इस दावे पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। अफगानिस्तान ने साफ कहा है कि मसूद अजहर उसके देश में मौजूद नहीं है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर अजहर अफगानिस्तान में नहीं है तो फिर वह कहां है और पाकिस्तान इतने समय से उसे लेकर यही दावा क्यों करता रहा?

तालिबान ने पाकिस्तान के दावे को किया खारिज

अफगान विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख मसूद अजहर अफगानिस्तान में नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल किसी दूसरे देश के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा।

तालिबान सरकार का यह बयान पाकिस्तान के उस पुराने दावे के बिल्कुल विपरीत है, जिसमें कहा जाता रहा है कि अजहर पाकिस्तान से निकलकर अफगानिस्तान चला गया था और वहीं से अपने आतंकी संगठन को संचालित कर रहा है।

2019 से पाकिस्तान देता रहा है यही सफाई

पाकिस्तान का दावा रहा है कि मसूद अजहर मई 2019 में डूरंड लाइन पार करके अफगानिस्तान चला गया था। इसके बाद से वह फरार है और पाकिस्तान में मौजूद नहीं है। यही दलील पाकिस्तान की ओर से उसकी गिरफ्तारी नहीं होने के सवाल पर भी दी जाती रही है।

लेकिन अब तालिबान के वरिष्ठ अधिकारी के बयान के बाद पाकिस्तान की इस कहानी पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। खास तौर पर इसलिए क्योंकि अफगानिस्तान पहले भी अजहर की मौजूदगी से इनकार कर चुका है।

FATF के दबाव से जुड़ा है पूरा मामला

मसूद अजहर का मामला पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बेहद संवेदनशील रहा है। पाकिस्तान 2018 से 2022 तक FATF की ग्रे लिस्ट में रहा था। आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान पर लगातार दबाव बनाया गया।

जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों के खिलाफ कार्रवाई भी FATF की निगरानी के प्रमुख मुद्दों में रही। पाकिस्तान ने आतंकी संगठनों पर प्रतिबंध लगाने और उनके वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई करने का भरोसा दिया था। वर्ष 2022 में पाकिस्तान ग्रे लिस्ट से बाहर हो गया।

मसूद अजहर पर भारत की नजर क्यों?

मसूद अजहर भारत में कई बड़े आतंकी हमलों के मामलों में वांछित है। उसका नाम 2001 के संसद हमले, 2008 के मुंबई हमले, 2016 के पठानकोट एयरबेस हमले और 2019 के पुलवामा हमले से जुड़े मामलों में सामने आया है।

संयुक्त राष्ट्र ने मई 2019 में मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित किया था। पाकिस्तान ने भी 2021 में उसे उसकी गैरमौजूदगी में दोषी ठहराया था। इसके बावजूद उसकी गिरफ्तारी को लेकर स्थिति लंबे समय से अस्पष्ट बनी हुई है।

तालिबान पहले भी दे चुका है ऐसा बयान

यह पहली बार नहीं है जब तालिबान ने मसूद अजहर के अफगानिस्तान में होने से इनकार किया हो। सितंबर 2022 में भी तालिबान सरकार के प्रवक्ता ने कहा था कि मसूद अजहर अफगानिस्तान में नहीं है। उस समय तालिबान ने यह भी कहा था कि पाकिस्तान ने अजहर की मौजूदगी को लेकर कोई औपचारिक संपर्क नहीं किया था।

अब एक बार फिर अफगान विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी का बयान सामने आया है। इससे पाकिस्तान के उस दावे को बड़ा झटका माना जा रहा है, जिसके मुताबिक अजहर अफगानिस्तान में छिपा हुआ है।

वैभव सूर्यवंशी के बल्ले का ये राज क्या है? बड़े मैच आते ही क्यों बदल जाता है इस 15 साल के बल्लेबाज का खेल

अब सबसे बड़ा सवाल- आखिर मसूद अजहर कहां है?

तालिबान के ताजा बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर मसूद अजहर अफगानिस्तान में नहीं है तो पाकिस्तान उसे लेकर बार-बार अफगानिस्तान का नाम क्यों लेता रहा? क्या पाकिस्तान के पास उसकी मौजूदा लोकेशन को लेकर कोई ठोस जानकारी है या फिर अफगानिस्तान का नाम लेकर वह अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचने की कोशिश करता रहा है?

फिलहाल तालिबान का रुख साफ है कि उसकी जमीन का इस्तेमाल किसी दूसरे देश के खिलाफ नहीं किया जाएगा। ऐसे में मसूद अजहर की वास्तविक लोकेशन और पाकिस्तान के पुराने दावे आने वाले समय में एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन सकते हैं।

Location :  New Delhi

Published :  9 September 2026, 3:19 PM IST

Advertisement