कालाजार बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए जाने जाते हैं श्याम सुन्दर

राष्ट्रपति भवन में आज नागरिक अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय आईएमएस के मेडिसिन विभाग में मानद प्रोफेसर प्रो. श्याम सुन्दर को पदमश्री पुरस्कार से नवाजा तो बनारस ही नही बिहार भी खुशी से झूम उठा।

Updated : 25 May 2026, 8:54 PM IST
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New Delhi: राष्ट्रपति भवन में आज नागरिक अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय आईएमएस के मेडिसिन विभाग में मानद प्रोफेसर प्रो. श्याम सुन्दर को पदमश्री पुरस्कार से नवाजा तो बनारस ही नही बिहार भी खुशी से झूम उठा। प्रो. श्याम सुंदर को कालाजार के निदान और उपचार में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए पद्मश्री सम्‍मान मिला।

जानिए प्रो. श्याम सुंदर के बारे में

बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के मेडिसन विभाग में प्रसिद्ध प्रोफेसर श्याम सुंदर ने  लिपोसोमल एम्फोटेरिसिन बी की एक खुराक से कालाजार के उपचार की विधि विकसित की है, जिससे विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा मान्यता मिली है।  पेरेमाइसीन और मिल्टेफोसीन दवा  नेपाल, भारत और बांग्लदेश  समेत दुनिया भर में इस्तेमाल की जा रही है।  सबसे पहले प्रो. श्याम ने ही आरके - 39 स्ट्रीप जांच का परीक्षण किया था।

चार दशक तक लड़ाई के बाद खत्म किया कालाजार को

1980 में ‘कालाजार’ से जूझ रहे पूर्वांचल के लोगों की जान बचाने के लिए डॉक्टर श्याम सुंदर अग्रवाल ने काम शुरू किया। लगभग 4 दशक तक लम्बी मेहनत के बाद इस खतरनाक बीमारी को लगभग जड़ से खत्म किया जा सका। डॉक्टर श्याम सुंदर अग्रवाल ने कालाजार जैसी खतरनाक बीमारी को डायग्नोज करने के लिए ऐसी तकनीक इजाद की, जिससे 10 मिनट में इसका पता लगाया जा सकता है। उस वक्त इस जांच के लिए 300 से 400 रुपये खर्च होते थे, लेकिन अब इस तकनीक के जरिए सिर्फ 50 रुपये खर्च होते हैं।

बीमारी के इलाज में मदद

इस बीमारी से बचाव के लिए टैबलेट भी बनाई जिसे साल 2002 में भारत सरकार ने एप्रूव्ड कर दिया। इसके पहले इस बीमारी के लिए इंजेक्शन का प्रयोग होता था, 2010 में उन्होंने इस बीमारी की सिंगल डोज दवा को भी तैयार किया, जिसके बाद काफी हद तक इस बीमारी के इलाज में मदद मिली।

इस सिंगल डोज दवा के बाद कालाजार जैसी बीमारी में भी मरीज शाम को हॉस्पिटल आता और 10 मिनट में उसकी जांच और फिर इस दवा को देकर अगले दिन उसे छुट्टी मिल जाती है. उनकी इस तकनीक को साल 2014 में नेपाल और बांग्लादेश में भी अपनाया गया।

 बिहार के निवासी डॉ. श्याम सुंदर

डॉ. श्याम सुंदर अग्रवाल बिहार के मुज्जफरपुर के निवासी हैं। उनकी माने तो कभी भी अवॉर्ड के लिए काम नहीं किया बल्कि देश और अपनी जन्मभूमि के बारे में हमेशा सोचा। देश-विदेश में इसके पहले भी उन्हें कई अवॉर्ड मिले हैं लेकिन पदमश्री ने हम सबका गौरव बढ़ाया।

Location :  New Delhi

Published :  25 May 2026, 8:11 PM IST

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