UP Local Poll: यूपी में ग्राम प्रधान बने रहेंगे प्रशासक या हटेंगे पद से, हाई कोर्ट का फैसला आज: जानिए कब होंगे पंचायत चुनाव

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद निर्वाचित ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के फैसले पर संवैधानिक सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने कहा कि इसमें उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम की धारा 12(3-ए) की संवैधानिक वैधता की जांच की आवश्यकता है।

Post Published By: Jay Chauhan
Updated : 13 July 2026, 1:16 AM IST
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Lucknow: हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने के मामले में गंभीर संवैधानिक प्रश्न उठाए हैं। न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ के समक्ष मामले में दाखिल याचिकाओं पर शुक्रवार को सुनवाई जारी है। कोर्ट ने कहा कि इसमें उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम की धारा 12(3-ए) की संवैधानिक वैधता की जांच की आवश्यकता है। कोर्ट आज सोमवार को इस महत्वपूर्ण मामले पर फैसला सुनाई सकती है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने मौजूदा ग्राम प्रधानों को पंचायतों के अगले चुनाव तक प्रशासक के पद पर रखने का फैसला लिया है। इस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सरकार से संवैधानिक व्यवस्था से कुछ कड़े सवाल पूछे हैं।
अदालत ने पूछा है कि ग्राम पंचायत का कार्यकाल समाप्त हो गया, लेकिन मौजूदा ग्राम प्रधान ही यदि प्रशासक बना रहेगा तो क्या इसे कार्यकाल बढ़ाना माना जाएगा? कोर्ट ने पूछा है कि क्या इससे राज्य निर्वाचन आयोग की भूमिका कमजोर होगी? अब यूपी सरकार को इन प्रश्नों के जवाब अदालत को देने होंगे।
कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम की धारा 12(3-ए) की वैधता पर विचार किए जाने की आवश्यकता है। न्यायालय ने पंचायतीराज विभाग के अपर मुख्य सचिव को अगली सुनवाई पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होकर अपना पक्ष स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।

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संवैधानिक व्यवस्था का क्या है

न्यायालय ने कहा कि वर्ष 2000 में प्रेम लाल पटेल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में हाईकोर्ट ने इसी प्रकार के प्रावधान को संविधान के अनुच्छेद 243-ई और 243-के के विपरीत मानते हुए असंवैधानिक ठहराया था। हालांकि, बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने उस मामले में कानून के प्रश्नों को खुला छोड़ते हुए अपील का निस्तारण कर दिया था।
सुनवाई के दौरान अदालत ने सबसे अहम सवाल यही उठाया कि क्या ग्राम प्रधान को प्रशासक बनाना, उसके कार्यकाल को परोक्ष रूप से बढ़ाने जैसा नहीं है? अगर ऐसा है, तो फिर लोकतांत्रिक व्यवस्था और नियमित चुनाव कराने की संवैधानिक व्यवस्था का क्या होगा?

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कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

पीठ ने इन मुद्दों के महत्व को देखते हुए निर्देश दिया कि मामले को इसी तरह के सवालों से संबंधित अन्य लंबित जनहित याचिकाओं के साथ सूचीबद्ध किया जाए. अदालत ने राज्य सरकार से निर्वाचित निकाय का कार्यकाल समाप्त होने के बाद पूर्व ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में बनाए रखने के कानूनी आधार और संवैधानिक औचित्य को स्पष्ट करने को भी कहा।

Location :  Lucknow

Published :  13 July 2026, 1:13 AM IST

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