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दिव्यांग युवक
Sonbhadra: रात की खामोशी में जैसे कोई सच्चाई दबा दी गई हो, वैसे ही एक 22 साल के दिव्यांग युवक की जिंदगी सरकारी फाइलों में कहीं अटक कर रह गई है। जन्म से दिव्यांग हिमांचल हर दिन अपने हालात से लड़ रहा है, उसे अब तक किसी भी सरकारी योजना का सहारा नहीं मिल पाया। सवाल ये है कि आखिर किसकी लापरवाही से एक जरूरतमंद आज भी मदद के इंतजार में है?
क्या है पूरा मामला?
सोनभद्र जिले के नगवां ब्लॉक के ग्राम पंचायत डोरिया से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां 22 वर्षीय दिव्यांग युवक हिमांचल अब तक सरकारी योजनाओं से पूरी तरह वंचित है। जन्म से दिव्यांग होने के बावजूद उसे न तो दिव्यांग पेंशन मिल रही है और न ही आवास या अन्य किसी योजना का लाभ।
सरकारी कर्मचारियों से नहीं मिली मदद
परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी उनके लिए संघर्ष बन चुका है। परिजनों का कहना है कि उन्होंने कई बार सरकारी दफ्तरों में आवेदन किया, लेकिन हर बार उन्हें अलग-अलग कारण बताकर टाल दिया गया। कभी दस्तावेजों की कमी बताई गई तो कभी प्रक्रिया लंबित होने की बात कहकर उन्हें वापस भेज दिया गया।
इस वजह से टूट गया पूरा परिवार
इस लगातार टालमटोल से परिवार मानसिक और आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट चुका है। हिमांचल की बहन ने प्रशासन से गुहार लगाते हुए कहा है कि उनके भाई को उसका हक दिलाया जाए। जिससे वह भी सामान्य जीवन जी सके। गांव के अन्य ग्रामीणों ने भी इस मामले को गंभीर बताया है। उनका कहना है कि सिर्फ हिमांचल ही नहीं, बल्कि कई ऐसे पात्र लोग हैं जो सरकारी योजनाओं से वंचित हैं। ग्रामीणों ने प्रशासनिक तंत्र की सुस्ती और लापरवाही पर सवाल उठाए हैं।
Location : Sonbhadra
Published : 2 May 2026, 4:54 PM IST