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वाराणसी में गंगा का रौद्र रूप (Image: Social Media)
Varanasi: वाराणसी में गंगा अब धीरे-धीरे अपना रौद्र रूप दिखाने लगी है। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने के कारण घाटों से निकलकर पानी अब सड़कों तक पहुंचने लगा है। शनिवार को गंगा का पानी अस्सी घाट जाने वाले मार्ग तक पहुंच गया। दशाश्वमेध घाट, मणिकर्णिका घाट और नमो घाट समेत कई प्रमुख घाटों पर बाढ़ का असर साफ दिखाई देने लगा है। दशाश्वमेध घाट पर जल पुलिस कार्यालय पानी की चपेट में आ गया, वहीं शीतला घाट पर स्थित शीतला मंदिर और नमो घाट पर लगा नमस्ते स्कल्पचर भी पानी में डूब गया है।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार शनिवार को राजघाट गेज साइट पर गंगा का जलस्तर 69.21 मीटर दर्ज किया गया। यह चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर से महज 1.05 मीटर नीचे है। गंगा में लगातार बढ़ोतरी के कारण इसकी सहायक नदियां भी उफान पर हैं। नदी किनारे रहने वाले लोगों में डर का माहौल है। कई परिवार अपने घर छोड़कर ऊंचे स्थानों पर पहुंचने लगे हैं। लोग अपने साथ जरूरी सामान और पालतू जानवरों को लेकर सुरक्षित जगह तलाश रहे हैं।
गंगा के पलट प्रवाह और वरुणा नदी में बढ़ते पानी के कारण सारनाथ क्षेत्र के कई इलाके प्रभावित हो गए हैं। पुलकोहना, सलारपुर, डिपो, दीनदयालपुर और नक्खी घाट के मोहल्लों में पानी पहुंच गया है। सलारपुर डिपो क्षेत्र में नदी किनारे रहने वाले करीब 50 परिवारों के घरों में पानी घुस गया है। इनमें ज्ञायंती देवी, परमिला, लालू, रामधनी, सोनू, डब्लू, रत्न, चंदा, बबीता और सन्नी समेत कई परिवार शामिल हैं। मजबूरी में लोग डिपो के ऊपर तिरपाल लगाकर रहने को मजबूर हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बाढ़ के दौरान सलारपुर प्राथमिक विद्यालय में जिला प्रशासन की ओर से अस्थायी राहत शिविर बनाया जाता था। यहां खाने, बिजली और दवा की व्यवस्था रहती थी, लेकिन इस बार अभी तक ऐसी कोई व्यवस्था नजर नहीं आई है। वहीं दशाश्वमेध घाट पर बढ़ते पानी ने सिर्फ धार्मिक गतिविधियों को प्रभावित नहीं किया है, बल्कि छोटे दुकानदारों और होटल कारोबारियों की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ा है।
दशाश्वमेध घाट के दुकानदारों का कहना है कि पानी बढ़ते ही सबसे पहले दुकानें खाली करनी पड़ती हैं। सामान को सुरक्षित जगह पहुंचाने में काफी खर्च और मेहनत लगती है। बाढ़ के दौरान कमाई पूरी तरह बंद हो जाती है। पूजा सामग्री दुकानदार विष्णु यादव ने बताया कि बाढ़ उतरने के बाद भी घाट और दुकानों की सफाई में कई दिन लग जाते हैं। वहीं चाय-नाश्ते की दुकान चलाने वाले विवेक दुबे का कहना है कि पानी बढ़ने के बाद ग्राहक आना बंद हो जाते हैं और रोज कमाने वाले लोगों के लिए यह बड़ी परेशानी बन जाती है। फूल-माला और प्रसाद विक्रेता दीपचंद मोदनवाल ने बताया कि श्रद्धालुओं की संख्या घटने से सामान खराब होने का नुकसान उठाना पड़ता है। दुकानदार इशू रस्तोगी के मुताबिक, पानी में फर्नीचर और अन्य सामान खराब हो जाता है, जिसकी मरम्मत में भी काफी खर्च आता है।
चौबेपुर क्षेत्र में नाद और गोमती नदी का पानी भी धीरे-धीरे खेतों की ओर बढ़ने लगा है। कैथी मार्कंडेय महादेव घाट की सीढ़ियों तक पानी पहुंच गया है। ढकना गौरीशंकर महादेव घाट और चंद्रावती जैन मंदिर घाट पर भी जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। गौरा उपरवार इलाके में पानी बढ़ने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन की निगाह अब बढ़ते जलस्तर और प्रभावित इलाकों पर बनी हुई है।
Location : Varanasi
Published : 23 August 2026, 8:05 PM IST