10 गवाह भी नहीं दिला पाए सजा! केस डायरी-साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने 3 आरोपियों को दी बड़ी राहत

कोर्ट ने मंसूरपुर के पूर्व चेयरमैन श्याम पाल के भाई पर जानलेवा हमले के 10 साल पुराने बहुचर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने पर्याप्त और ठोस सबूतों के अभाव में तीनों आरोपियों - हरिओम सैनी, विपिन और रामकुमार को बरी कर दिया है। वर्ष 2016 के इस रास्ते के विवाद में अभियोजन पक्ष ने 10 गवाह पेश किए थे।

Post Published By: Nitin Parashar
Updated : 3 June 2026, 8:04 PM IST
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Muzaffarnagar : मुजफ्फरनगर में करीब एक दशक पुराने बहुचर्चित हत्या के प्रयास के मुकदमे में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए तीनों आरोपितों को बरी कर दिया है। मामला वर्ष 2016 का है, जब रास्ते के विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच मारपीट हुई थी।

पूर्व चेयरमैन ने दर्ज कराया था मुकदमा

तत्कालीन मंसूरपुर चेयरमैन श्याम पाल ने अपने भाई मैनपाल पर जानलेवा हमला किए जाने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने मामले में हत्या के प्रयास समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी। इस मामले में हरिओम सैनी, विपिन और रामकुमार को आरोपी बनाया गया था।

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10 साल तक चली कानूनी लड़ाई

लगभग 10 वर्षों तक चली सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 10 गवाह पेश किए गए और न्यायालय ने सभी साक्ष्यों, गवाहों के बयानों तथा केस डायरी का विस्तृत परीक्षण किया।

ठोस सबूतों के अभाव में कोर्ट ने सुनाया फैसला

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। इसी आधार पर न्यायालय ने तीनों आरोपितों को दोषमुक्त करार देते हुए बरी करने का आदेश दिया। फैसले के बाद आरोपित पक्ष ने राहत जताई और इसे न्याय की जीत बताया।

Location :  Muzaffarnagar

Published :  3 June 2026, 8:04 PM IST

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