आजादी के 78 साल बाद भी अंधेरे में सोनभद्र का यह इलाका, समाजवादी पार्टी ने उठाया मुद्दा

सोनभद्र के रॉबर्ट्सगंज ब्लॉक के पथरहा टोला में आज़ादी के 78 साल बाद भी बिजली आपूर्ति शुरू न होने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश सचिव प्रदीप यादव के नेतृत्व में ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए जल्द बिजली उपलब्ध कराने की मांग की और चेतावनी दी कि समाधान न होने पर वे जिला मुख्यालय पर बड़ा आंदोलन करेंगे।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 23 November 2025, 12:05 PM IST
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Sonbhadra: विकास के दावों और सरकारी योजनाओं की लम्बी सूची के बीच सोनभद्र जनपद के रॉबर्ट्सगंज ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत पईका का टोला पथरहा आज भी घोर अंधेरे में है। आज़ादी के 78 वर्ष बीत जाने के बाद भी यहां बिजली की एक भी लाइन न पहुंचना ग्रामीणों के लिए गहरी पीड़ा और प्रशासनिक उपेक्षा का प्रतीक बन चुका है।

पचासों ग्रामीणों की बसावट वाले इस टोला में न तो बिजली के खंभे लगाए गए हैं और न ही ट्रांसफॉर्मर की व्यवस्था की गई है। नतीजा यह है कि गांव के बच्चे रात में पढ़ाई नहीं कर पाते, बुजुर्ग अंधेरे में रहने को मजबूर हैं और व्यवसाय तथा कृषि कार्यों पर लगातार इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश सचिव प्रदीप यादव ने खोला मोर्चा

गुरुवार को इसी समस्या को लेकर ग्रामीणों ने समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश सचिव प्रदीप यादव के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों के साथ सड़क पर उतरे प्रदेश सचिव ने बताया कि वर्षों से अधिकारीयों के संज्ञान में यह मुद्दा लाया जा रहा है, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है, बिजली नहीं।

उन्होंने कहा कि एक के बाद एक आवेदन देने के बावजूद विभाग ने न तो खंभे लगाए और न ही ट्रांसफॉर्मर की स्थापना की कोई पहल की। “सरकार हर मंच से विकास की बात करती है, लेकिन पथरहा के लोगों को आज भी लालटेन और ढिबरी के भरोसे जीवन बिताना पड़ रहा है,” प्रदीप यादव ने आरोप लगाया।

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ग्रामीणों ने सुनाया दर्द

ग्रामीणों का कहना है कि चुनावों के दौरान नेताओं ने यहां बिजली पहुंचाने का वादा किया था, लेकिन चुनाव खत्म होते ही नेता और प्रशासन दोनों ने इस मुद्दे की ओर ध्यान देना बंद कर दिया। गांव के निवासी रोहन पाठक ने बताया कि कई बार जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखे गए, शिकायतें दर्ज कराई गई, लेकिन नतीजा शून्य रहा।

रोहन ने बताया, “हमारे बच्चे पढ़ नहीं पाते, रात को घर में कोई काम नहीं हो पाता। मोबाइल चार्ज करने के लिए भी कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।”

महिलाओं में भी आक्रोश

महिलाओं में भी बिजली न होने की समस्या को लेकर खासा आक्रोश है। प्रदर्शन में शामिल अनीता और रीता जायसवाल ने कहा कि बिना बिजली के घर के रोजमर्रा के काम करना बेहद कठिन हो गया है। गर्मी के मौसम में पंखे तक का सहारा न मिलना सबसे बड़ी समस्या है। वहीं सौर लैंप और लैंटेन का खर्चीला इंतजाम उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ डालता है।

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मौके पर ये लोग मौजूद रहे

इस विरोध प्रदर्शन में रोहन पाठक, विनोद जायसवाल, मुन्नू, धीरज, सोनू, धीरेन्द्र, अनीता, लल्लू, रीता जायसवाल, जगनरायन, नंदू और बुट्टल देवी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन ग्रामीणों के गुस्से ने साफ संकेत दे दिया कि अब वे बिजली के बिना और इंतजार करने को तैयार नहीं हैं।

कुल मिलाकर पथरहा की यह समस्या न केवल स्थानीय प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह सवाल भी उठाती है कि जब देश डिजिटल इंडिया और विकास के बड़े लक्ष्य तय कर रहा है, तब 78 साल बाद भी एक टोला को बिजली क्यों नसीब नहीं हो पाई?

Location : 
  • Sonbhadra

Published : 
  • 23 November 2025, 12:05 PM IST

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