पिता का बना, तो बेटे का क्यों नहीं? मुजफ्फरनगर में जाति प्रमाणपत्र विवाद पर भड़का धनगर समाज

मुजफ्फरनगर में धनगर समाज उत्थान समिति ने जाति प्रमाणपत्र जारी करने में हो रही परेशानियों को लेकर नाराजगी जताई है। समाज के प्रतिनिधियों ने प्रशासन से जल्द समाधान की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि समस्या का निस्तारण नहीं होने पर शांतिपूर्ण आंदोलन किया जाएगा।

Post Published By: Komal Chauhan
Updated : 10 July 2026, 6:03 PM IST
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Muzaffarnagar: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में धनगर समाज के लोगों ने जाति प्रमाणपत्र से जुड़ी समस्याओं को लेकर शासन और प्रशासन के प्रति नाराजगी जताई है। धनगर समाज उत्थान समिति के नेतृत्व में समाज के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने रुड़की रोड स्थित एक होटल में प्रेस वार्ता आयोजित कर अपनी समस्याओं को सामने रखा और जल्द समाधान की मांग की।

जाति प्रमाणपत्र जारी करने में आ रही दिक्कतें

समिति के प्रतिनिधियों का कहना है कि अनुसूचित जाति वर्ग के पात्र लोगों को नियमों के अनुसार जाति प्रमाणपत्र नहीं मिल पा रहे हैं। इसके कारण छात्रों, युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को विभिन्न प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। समाज के लोगों का कहना है कि समय पर प्रमाणपत्र न मिलने से शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी कठिनाई हो रही है।

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एक ही परिवार के सदस्यों के प्रमाणपत्र पर सवाल

धनगर समाज ने आरोप लगाया कि कई मामलों में एक ही परिवार के सदस्यों के साथ अलग-अलग व्यवहार किया जा रहा है। उनका कहना है कि कुछ मामलों में पिता के पास जाति प्रमाणपत्र होने के बावजूद पुत्र या अन्य परिवार के सदस्यों को प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जा रहा है। समिति का मानना है कि यदि परिवार के किसी सदस्य का जाति प्रमाणपत्र पहले से मौजूद है, तो उसी आधार पर अन्य पात्र सदस्यों को भी प्रमाणपत्र जारी किया जाना चाहिए।

अधिकारियों पर कार्रवाई न करने का आरोप

समाज के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि शिकायत लेकर जिला स्तर के अधिकारियों के पास जाने के बावजूद उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। उनका कहना है कि कई बार अधिकारी मामले को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताकर जिम्मेदारी से बचने का प्रयास करते हैं। इस स्थिति से समाज के लोगों में निराशा और असंतोष बढ़ रहा है।

युवाओं और विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित

समाजवादी पार्टी के शिक्षक प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष सतेंद्र पाल ने कहा कि धनगर समाज अनुसूचित जाति वर्ग में शामिल है, लेकिन इसके बावजूद समाज के लोगों को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जाति प्रमाणपत्र न मिलने का सबसे अधिक असर छात्रों और युवाओं पर पड़ रहा है, क्योंकि इसके बिना उन्हें शिक्षा और रोजगार के अवसरों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी

मंडल अध्यक्ष रवि कुमार ने कहा कि उत्तर प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में धनगर समाज की बड़ी आबादी निवास करती है। उन्होंने कहा कि यदि पात्र लोगों के जाति प्रमाणपत्र जल्द जारी नहीं किए गए तो समाज अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत आगे की रणनीति तय करेगा। वहीं, जिला अध्यक्ष लोकेश कुमार धनगर ने कहा कि यदि समस्या का निष्पक्ष और न्यायसंगत समाधान नहीं हुआ तो समाज जिला मुख्यालय पर संविधान और कानून के दायरे में रहकर शांतिपूर्ण और अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू करेगा।

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कई गांवों के लोगों ने दिखाई एकजुटता

प्रेस वार्ता और बैठक में जिले के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में धनगर समाज के लोग शामिल हुए। समाज के लोगों ने एकजुट होकर जाति प्रमाणपत्र से जुड़ी समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग दोहराई। प्रतिनिधियों ने कहा कि समाज की मांग केवल पात्र लोगों को उनके अधिकार दिलाने की है और इसके लिए वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे।

Location :  Muzaffarnagar

Published :  10 July 2026, 6:03 PM IST

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