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देवरिया जनपद के भलुअनी थाना क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों में किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। क्षेत्र में आवारा पशुओं और नीलगायों के बढ़ते आतंक से फसलें बर्बाद हो रही हैं, जिससे किसान भारी आर्थिक नुकसान झेलने को मजबूर हैं।
देवरिया में आवारा पशुओं और नीलगायों का आतंक
Deoria: देवरिया जनपद के भलुअनी थाना क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों में किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। क्षेत्र में आवारा पशुओं और नीलगायों के बढ़ते आतंक से फसलें बर्बाद हो रही हैं, जिससे किसान भारी आर्थिक नुकसान झेलने को मजबूर हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि मेहनत से की गई खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा बनती जा रही है।
किसानों का कहना है कि वे खून-पसीना एक कर किसी तरह खेती करते हैं। बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और डीजल जैसी बढ़ती लागत के बीच खेती करना पहले ही कठिन हो चुका है। ऊपर से फसल की पूरी सुरक्षा न हो पाने के कारण उनकी सारी मेहनत एक झटके में नष्ट हो जाती है। किसानों के लिए खेती ही आजीविका का एकमात्र साधन है, और इसी पर उनके परिवार का भविष्य निर्भर करता है।
किसानों का दर्द यहीं खत्म नहीं होता। उनका कहना है कि मौजूदा समय में वे तीनहरी मार झेल रहे हैं। एक ओर फसलों का वाजिब दाम नहीं मिल पाता, दूसरी ओर बाजार की हर वस्तु महंगे दाम पर खरीदनी पड़ती है। इसके अलावा प्रकृति की मार—आंधी, तूफान, ओलावृष्टि, आग लगने की घटनाएं और सूखा—खेती को और अधिक नुकसान पहुंचा रही हैं।
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— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) January 10, 2026
इन सभी समस्याओं के बीच आवारा पशु और नीलगाय किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। रात के अंधेरे में झुंड के झुंड खेतों में घुसकर फसलों को रौंद देते हैं। कई किसानों की पूरी फसल कुछ ही घंटों में नष्ट हो जाती है, जिससे उन्हें भारी मानसिक और आर्थिक तनाव का सामना करना पड़ता है।
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डाइनामाइट न्यूज़ की टीम ने जब किसानों से बातचीत की तो उन्होंने दुखी मन से प्रशासन के प्रति अपनी पीड़ा जाहिर की। किसानों का कहना है कि सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा आवारा पशुओं और नीलगायों की रोकथाम के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। गौशालाओं की कमी और निगरानी के अभाव में पशु खुलेआम घूम रहे हैं।
मवेशियों के आतंक को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। किसानों ने मांग की है कि जल्द से जल्द प्रभावी योजना बनाकर आवारा पशुओं और नीलगायों से फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि उनकी मेहनत और भविष्य सुरक्षित रह सके।