देवरिया के इस सरकारी स्कूल में शिक्षा व्यवस्था की खुली पोल; बच्चों को नहीं पता मुख्यमंत्री का नाम, चूल्हे पर बनता मिला मिड-डे मील

देवरिया के एक सरकारी स्कूल की ग्राउंड रिपोर्ट में ऐसे नजारे सामने आए जिन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए। बच्चों के जवाब, मिड-डे मील की स्थिति और स्कूल की मूलभूत सुविधाओं ने कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 5 August 2026, 2:17 PM IST
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Deoria: सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा और सुविधाओं के दावों के बीच देवरिया के सदर ब्लॉक स्थित कंपोजिट विद्यालय अगया (ग्राम पंचायत छितरुवा) की ग्राउंड रिपोर्ट ने कई ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिन पर जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान जाना जरूरी है। डाइनामाइट न्यूज़ की टीम जब विद्यालय पहुंची तो यहां शिक्षा, मिड-डे मील, पेयजल और सुरक्षा व्यवस्था की तस्वीर सरकारी दावों से अलग नजर आई।

बच्चों से सामान्य सवाल पूछे

डाइनामाइट न्यूज़ की टीम ने कक्षा 8 के बच्चों से सामान्य ज्ञान और बुनियादी पढ़ाई से जुड़े कुछ आसान सवाल पूछे। इनमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का नाम, गांव, ब्लॉक, तहसील, थाना, स्वर और व्यंजन जैसे सामान्य प्रश्न शामिल थे। सबसे हैरानी की बात यह रही कि कई बच्चे मुख्यमंत्री का नाम नहीं बता सके। कुछ बच्चों ने मुख्यमंत्री की जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम बताया। वहीं अधिकांश बच्चे अन्य सामान्य सवालों के भी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। इससे विद्यालय में पढ़ाई की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

शिक्षक ने जांच पर उठाए सवाल

विद्यालय में तैनात सहायक अध्यापक दुर्गेश पांडे ने टीम से कहा कि बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से ऐसा आदेश जारी किया गया है कि बिना अनुमति कोई बाहरी व्यक्ति विद्यालय की जांच नहीं कर सकता। जब टीम ने उस आदेश की प्रति मांगी तो वह उपलब्ध नहीं कराई गई। शिक्षक का कहना था कि जिन बच्चों से सवाल पूछे गए, वे पढ़ाई में कमजोर हैं और तेज छात्रों से प्रश्न पूछे जाने चाहिए थे।

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विद्यालय में 167 छात्र

विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापिका अमिता श्रीवास्तव ने बताया कि स्कूल में कुल 10 कर्मचारी तैनात हैं। इनमें सात शिक्षक, दो शिक्षामित्र और एक अनुदेशक शामिल हैं। कुल छह महिला और चार पुरुष कर्मचारी हैं। निरीक्षण के दौरान एक कर्मचारी अनुपस्थित मिला। विद्यालय के रिकॉर्ड के अनुसार यहां कुल 167 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं, जिनमें 85 छात्राएं और 82 छात्र हैं। निरीक्षण के समय तीन रसोइया विद्यालय में मौजूद थीं।

टूटी मिली सभी नलों की टोटियां

विद्यालय परिसर में पेयजल व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं मिली। निरीक्षण के दौरान परिसर में लगे लगभग सभी नलों की टोटियां टूटी हुई थीं। ऐसे में बच्चों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।जब इस बारे में प्रधानाध्यापिका से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि विद्यालय में कई बार चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं। अज्ञात लोग ताले, फाटक और नलों की टोटियां तोड़ देते हैं।

चूल्हे पर बन रहा था मिड-डे मील

मिड-डे मील की व्यवस्था की जांच के दौरान किचन में रसोइया सूर्यकांती देवी लकड़ी के चूल्हे पर भोजन बनाती मिलीं। उन्होंने बताया कि एलपीजी गैस सिलेंडर खत्म हो गया था, इसलिए मजबूरी में चूल्हे पर खाना तैयार किया जा रहा है।रसोइया के अनुसार उस दिन पांच किलो आलू, गोभी और सोयाबीन उपलब्ध कराया गया था। उन्होंने बताया कि कुल 88 रोटियां बनाई गईं और आलू, सोयाबीन तथा गोभी की सब्जी तैयार की गई।

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बच्चों की बात अलग निकली

जब टीम ने अलग-अलग बच्चों से पूछा कि उन्हें खाने में क्या मिला, तो अधिकांश बच्चों ने बताया कि उन्हें केवल एक रोटी और आलू-सोयाबीन की सब्जी मिली। किसी भी बच्चे ने गोभी मिलने की पुष्टि नहीं की। इससे मिड-डे मील की गुणवत्ता और निर्धारित मेन्यू के पालन को लेकर भी सवाल खड़े हो गए।

खेल का मैदान भी नहीं

विद्यालय में बच्चों के खेलने के लिए कोई समुचित खेल मैदान नहीं मिला।  प्रधानाध्यापिका ने बताया कि विद्यालय में लगातार चोरी और तोड़फोड़ की घटनाएं होती रहती हैं। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि इसकी जानकारी शिक्षा विभाग या स्थानीय पुलिस को नहीं दी गई। उनके अनुसार केवल ग्राम प्रधान प्रतिनिधि विजय बहादुर गुप्ता को इसकी सूचना दी गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी बताया कि विद्यालय का राशन ग्राम प्रधान के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है।

अब शिक्षा विभाग पर टिकी निगाहें

डाइनामाइट न्यूज़ की इस ग्राउंड रिपोर्ट में शिक्षा की गुणवत्ता, मिड-डे मील, पेयजल व्यवस्था, सुरक्षा और आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी कई कमियां सामने आई हैं। वहीं विद्यालय प्रशासन ने अपनी ओर से परिस्थितियों और समस्याओं का पक्ष भी रखा है।

Location :  Deoria

Published :  5 August 2026, 2:17 PM IST

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