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सरकारी स्कूलों के भवन जर्जर (Img: Dynamite News)
Deoghar: बच्चों के बेहतर भविष्य की नींव स्कूलों में रखी जाती है, लेकिन जब स्कूल की छत ही सुरक्षित न हो और दीवारें कभी भी ढहने की आशंका पैदा करें, तो शिक्षा के इस मंदिर में बच्चों की सुरक्षा पर सवाल उठना लाजिमी है। देवघर जिले में सरकारी शिक्षा व्यवस्था की ऐसी ही चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। जिले के 66 स्कूलों के भवन जर्जर स्थिति में हैं। कहीं दीवारों में पेड़ उग आए हैं, तो कहीं छत और छज्जों का प्लास्टर टूटकर गिर रहा है। इन परिस्थितियों के बीच शिक्षक बच्चों को पढ़ाने और विद्यार्थी अपनी पढ़ाई जारी रखने को मजबूर हैं। सवाल सिर्फ भवनों की मरम्मत का नहीं, बल्कि उन सैकड़ों बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा का भी है, जिनका रोजाना इन जर्जर इमारतों से सामना होता है।
चरकी पहाड़ी स्कूल की स्थिति सरकारी विद्यालयों की बदहाल बुनियादी सुविधाओं की गंभीर तस्वीर पेश करती है। स्कूल की दीवारों पर पेड़ उग आए हैं। भवन की हालत देखकर ही उसकी जर्जर स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। यहां कार्यरत शिक्षिकाओं का कहना है कि नौकरी की जिम्मेदारी के कारण उन्हें विद्यालय आना पड़ता है, लेकिन भवन की हालत ऐसी है कि हर दिन किसी अनहोनी की आशंका बनी रहती है।
शिक्षिकाओं के अनुसार, विद्यालय की बदहाली से शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया है। बावजूद इसके अब तक समस्या का ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। ऐसे में शिक्षकों के सामने बच्चों को पढ़ाने के साथ उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की दोहरी चुनौती है।
गिर रहा छज्जों से प्लास्टर(Img: Dynamite News)
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समस्या केवल चकरी पहाड़ी स्कूल तक सीमित नहीं है। देवीपुर, सोनाराठाढ़ी, मोहनपुर और करौं समेत जिले के विभिन्न प्रखंडों में भी सरकारी विद्यालयों के भवनों की स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है।
देवीपुर के एक मध्य विद्यालय में छत और छज्जों का प्लास्टर झड़ने लगा है। भवन की खराब हालत के कारण शिक्षकों और अभिभावकों के मन में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। बारिश और मौसम के प्रभाव के बीच ऐसे भवनों की स्थिति और गंभीर हो सकती है। बुनियादी सुविधाओं का अभाव भी परेशानी बढ़ा रहा है। कुछ विद्यालयों में चहारदीवारी नहीं होने से परिसर की सुरक्षा का सवाल भी खड़ा हो रहा है।
जर्जर स्कूल इमारतें (Img: Dynamite News)
इस मामले में जिला शिक्षा अधीक्षक मधुकर कुमार ने बताया कि उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया की ओर से हाल ही में सरकारी विद्यालयों की मरम्मत के लिए राशि आवंटित की गई है। शिक्षा विभाग की ओर से भी मरम्मत कार्य के लिए राशि जारी कर दी गई है। इस संबंध में आवश्यक आदेश भी निर्गत किया जा चुका है। हालांकि, अब महत्वपूर्ण यह होगा कि आवंटित राशि से मरम्मत का काम धरातल पर कब शुरू होता है और जर्जर भवनों को सुरक्षित बनाने की प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी की जाती है।
देवघर के 66 सरकारी विद्यालयों की जर्जर स्थिति प्रशासन और शिक्षा विभाग के सामने एक गंभीर चुनौती है। स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक माहौल तैयार करने के लिए केवल शिक्षकों की नियुक्ति, पाठ्य सामग्री और योजनाओं की घोषणा पर्याप्त नहीं है। बच्चों को सुरक्षित भवन उपलब्ध कराना भी उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी है।
Location : Deoghar
Published : 3 November 2026, 1:21 PM IST
Topics : Deoghar News Dilapidated School Buildings Government School Safety School Building School Repair Funds