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सोनभद्र में ‘घुसखोर पंडित’ फिल्म के टाइटल को लेकर विवाद बढ़ गया है। मनोज बाजपेई और नीरज पांडेय समेत अन्य के खिलाफ शिकायत दर्ज कर फिल्म पर प्रतिबंध और कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
सोनभद्र में मनोज बाजपेई और नीरज पांडेय के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए अफसरों को शिकायत दी
Sonbhadra: सोनभद्र में एक फिल्म के टाइटल को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ‘घुसखोर पंडित’ नामक फिल्म पर सनातन धर्म और ब्राह्मण समाज के अपमान का आरोप लगाते हुए रॉबर्ट्सगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है। इस मामले ने धार्मिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है, वहीं शिकायतकर्ताओं ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाने और संबंधित कलाकारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
रॉबर्ट्सगंज थाने में दी गई शिकायत
जानकारी के मुताबिक अभिनेता मनोज बाजपेई, निर्देशक नीरज पांडेय और अन्य अज्ञात सहयोगियों के खिलाफ शिकायत दी गई है। आरोप है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म और नेटफ्लिक्स पर दिखाई जा रही ‘घुसखोर पंडित’ नामक फिल्म के जरिए एक विशेष जाति और सनातन धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई है। शिकायत एक भगवत कथा वाचक की ओर से दी गई, जो इन दिनों तेज नगर, डरौरा में वरिष्ठ अधिवक्ता पवन मिश्रा के निवास पर कथा सुना रहे हैं।
ब्राह्मण समाज के अपमान का आरोप
शिकायतकर्ता मनीष शरण महाराज का कहना है कि फिल्म में पंडित और ब्राह्मण समाज को गलत तरीके से चित्रित किया गया है, जिससे समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं। उनका आरोप है कि इस तरह की सामग्री सामाजिक सौहार्द बिगाड़ सकती है और सनातन धर्म की छवि को नुकसान पहुंचाती है। उन्होंने पुलिस से संबंधित सभी कलाकारों और निर्माताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
कानूनी कार्रवाई और प्रतिबंध की मांग
महाराज ने अपने सहयोगियों और अधिवक्ता पवन मिश्रा के साथ मिलकर फिल्म या वेब सीरीज से जुड़े सभी लोगों पर कार्रवाई की अपील की है। उनका कहना है कि किसी भी वर्ग या जाति को निशाना बनाकर बनाई गई सामग्री स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए। साथ ही ‘घुसखोर पंडित’ फिल्म को पूरी तरह प्रतिबंधित करने की मांग भी उठाई गई है।
कथा पंडाल में भी उठा मुद्दा
एडवोकेट पवन मिश्रा ने इस मामले पर नाराजगी जताते हुए लोगों से विरोध में एकजुट होने का आह्वान किया। कथा के दौरान भी इस विषय पर चर्चा हुई, जहां मौजूद लोगों ने कथावाचक के विचारों का समर्थन किया और आक्रोश व्यक्त किया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वे कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे और जरूरत पड़ने पर अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे, जब तक कि फिल्म पर प्रतिबंध नहीं लग जाता।