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रामपुर जिले की मिलक तहसील के क्षेत्राधिकारी (सीओ) राजवीर सिंह परिहार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद गहरा गया है। निजी स्कूल के एक कार्यक्रम के दौरान कथित जातिसूचक टिप्पणी को लेकर दलित समाज में आक्रोश है। नगीना सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने वीडियो साझा कर कार्रवाई की मांग की है।
मिलक के सीओ पर गंभीर आरोप
Rampur: मिलक तहसील के क्षेत्राधिकारी (सीओ) राजवीर सिंह परिहार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद जिले में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई। यह वीडियो कथित तौर पर मिलक स्थित एक निजी स्कूल में आयोजित फुटबॉल प्रतियोगिता के समापन समारोह का बताया जा रहा है, जहां सीओ मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे।
मंच से संबोधन के दौरान उन्होंने एक पुरानी कहावत का जिक्र किया, जिसमें ‘चमार’ शब्द का प्रयोग है। हालांकि वीडियो में यह भी कहा गया कि “जो पहला गोल मार ले वही सरदार है,” लेकिन सार्वजनिक मंच से जातिसूचक शब्द के प्रयोग को लेकर दलित समाज में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब नगीना के सांसद और आज़ाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट साझा किया। उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एक जिम्मेदार पद पर बैठे पुलिस अधिकारी द्वारा इस तरह की भाषा का प्रयोग करना न केवल असंवेदनशील है, बल्कि कानूनन दंडनीय अपराध भी है। सांसद ने मांग की कि सीओ के खिलाफ तत्काल सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और विभागीय जांच कर उन्हें पद से हटाया जाए। उनके बयान के बाद राजनीतिक हलकों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों ने भी मामले में हस्तक्षेप की मांग शुरू कर दी है।
दूसरी ओर, सीओ राजवीर सिंह परिहार ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो को साजिश के तहत एडिट किया गया है, ताकि उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके। उनका दावा है कि उनका उद्देश्य किसी भी जाति विशेष का अपमान करना नहीं था, बल्कि खेल भावना को प्रोत्साहित करना था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी रामपुर विद्यासागर मिश्र ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच की जिम्मेदारी अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) को सौंपी गई है, जो वीडियो की तकनीकी जांच करेंगे। यह देखा जाएगा कि वीडियो के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ हुई है या नहीं। एसपी ने स्पष्ट किया है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है, लेकिन वायरल वीडियो ने एक बार फिर सार्वजनिक मंचों पर भाषा की मर्यादा और जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।