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यमुना नदी पर बने अढ़ावल पीपे पुल में बड़ा हादसा टल गया, जब पुल को जोड़ने वाले फ्रेम एंगल के तीन हुक टूटने से बीच में करीब दो मीटर का फासला हो गया। फतेहपुर, बांदा और हमीरपुर को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण पुल पर अफरा-तफरी मच गई और आवागमन पूरी तरह बंद करना पड़ा।
यमुना पुल टूटने से मचा हडकंप
Fatehpur: यमुना नदी पर बने अढ़ावल पीपे पुल में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब पीपों को जोड़ने वाले फ्रेम एंगल के तीन हुक अचानक टूट गए। इससे पुल के बीचो-बीच करीब दो मीटर का खतरनाक फासला बन गया। यह पीपे पुल फतेहपुर, बांदा और हमीरपुर जनपदों को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है, जिस पर रोजाना हजारों लोग निर्भर रहते हैं। घटना के समय पुल पर मौजूद राहगीरों में दहशत फैल गई और देखते ही देखते आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया। गनीमत रही कि हादसे के वक्त कोई बड़ा वाहन पुल पर नहीं था, जिससे एक बड़ी दुर्घटना टल गई।
हादसे के बाद भी कुछ लोगों ने जोखिम उठाते हुए पुल पार करना शुरू कर दिया। टूटे हिस्से पर पड़ी चादर को अस्थायी सहारे के रूप में रखकर लोग पैदल और साइकिल से नदी पार करते दिखे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और फतेहपुर व बांदा दोनों ओर से पुल पर रस्सी लगवाकर आवागमन पूरी तरह बंद करा दिया। पुलिस ने लोगों को समझाया कि पुल की हालत बेहद खतरनाक है और किसी भी तरह की लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
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घटना की जानकारी मिलते ही सेतु निगम बांदा के ठेकेदार ने मजदूरों को लगाकर पीपे पुल की मरम्मत का कार्य तत्काल शुरू करा दिया। हालांकि पुल बंद होने से आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। चार पहिया और दो पहिया वाहन चालकों को चिल्ला पुल होकर लंबा रास्ता तय करना पड़ा, जबकि आसपास के गांवों के लोगों ने यमुना नदी पार करने के लिए नावों का सहारा लिया।
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बांदा जनपद के पैलानी, सबहदा, महबरा, बड़ागांव सहित कई गांवों के ग्रामीणों ने सेतु निगम बांदा के ठेकेदार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पीपे पुल के निर्माण में मानकों की अनदेखी की गई और सड़ी व कमजोर लकड़ी तथा घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। उनका आरोप है कि इसी लापरवाही के चलते पुल में यह खतरनाक स्थिति बनी। ग्रामीणों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।