UP में ऑनलाइन बाल शोषण मामले में बड़ा फैसला! CBI कोर्ट ने पूर्व जूनियर इंजीनियर समेत दो को सुनाई जेल की सजा

लखनऊ की विशेष CBI कोर्ट ने ऑनलाइन बाल शोषण से जुड़ी सामग्री के मामले में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के पूर्व जूनियर इंजीनियर रामभवन और निजी व्यक्ति नीलेश बलिराम गोरे को दोषी ठहराया है। दोनों को अलग-अलग अवधि की कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई गई।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 2 November 2026, 8:46 PM IST
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Lucknow: बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए इकट्ठा करने, भेजने और प्रकाशित करने के मामले में लखनऊ की विशेष CBI कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के एक पूर्व जूनियर इंजीनियर और महाराष्ट्र के एक निजी व्यक्ति को दोषी करार देते हुए अलग-अलग सजा सुनाई है। इस मामले में पूर्व जूनियर इंजीनियर को तीन साल और दूसरे आरोपी को एक साल की कठोर कारावास की सजा मिली है। दोनों पर जुर्माना भी लगाया गया है।

यह मामला ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (CSAEM) के प्रसार से संबंधित है। CBI ने इस मामले में अप्रैल 2022 में जांच शुरू की थी। जांच के दौरान महाराष्ट्र के दो शहरों में तलाशी लेकर डिजिटल उपकरण जब्त किए गए थे।

पूर्व जूनियर इंजीनियर को तीन साल की कठोर सजा

लखनऊ की विशेष CBI कोर्ट ने 31 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के तत्कालीन जूनियर इंजीनियर रामभवन और निजी व्यक्ति नीलेश बलिराम गोरे को दोषी ठहराया। कोर्ट ने रामभवन को तीन साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई। वहीं, दूसरे आरोपी नीलेश बलिराम गोरे को एक साल की कठोर कारावास की सजा दी गई। दोनों दोषियों पर जुर्माना भी लगाया गया है।

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मामले में आरोप था कि दोनों आरोपी इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म के जरिए बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री इकट्ठा करने, उसे दूसरे लोगों तक भेजने और प्रकाशित करने में शामिल थे।

2022 में CBI ने दर्ज किया था मामला

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 23 अप्रैल 2022 को इस मामले में केस दर्ज किया था। जांच एजेंसी को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री के संग्रह और प्रसार में आरोपियों की भूमिका की जांच करनी थी। जांच के सिलसिले में CBI ने महाराष्ट्र के भुसावल और जलगांव में तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान कई डिजिटल उपकरण जब्त किए गए। इन उपकरणों की जांच कर मामले से जुड़े डिजिटल सबूत जुटाए गए।

CBI की जांच का मुख्य फोकस इस बात पर था कि इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किस तरह बच्चों के शोषण से जुड़ी सामग्री को इकट्ठा करने और फैलाने के लिए किया गया।

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30 दिसंबर 2022 को दाखिल हुई थी चार्जशीट

मामले की जांच पूरी करने के बाद CBI ने 30 दिसंबर 2022 को दोनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद ट्रायल कोर्ट ने 21 जुलाई 2026 को दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए। मुकदमे की सुनवाई के दौरान सामने आए सबूतों और मामले की कार्यवाही के बाद कोर्ट ने दोनों आरोपियों को दोषी पाया। इसके बाद 31 अक्टूबर को दोनों को अलग-अलग अवधि की कठोर कारावास की सजा और जुर्माना सुनाया गया।

Location :  Lucknow

Published :  2 November 2026, 8:44 PM IST

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