बदायूं HPCL डबल मर्डर केस में बड़ा खुलासा! लूट नहीं, अंदरखाने की साजिश ने उड़ाए होश

बदायूं स्थित हिंदुस्तान पेट्रोलियम के एलपीजी बॉटलिंग प्लांट में हुए डबल मर्डर केस की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस ने अब इस वारदात को लूट नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिशन हत्या माना है। जांच में बोलेरो, ड्राइवर और प्रशासनिक लापरवाही की चौंकाने वाली परतें सामने आई हैं।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 21 March 2026, 3:36 PM IST
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Badaun: बदायूं के हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी HPCL के एलपीजी बॉटलिंग प्लांट में हुए दोहरे हत्याकांड की जांच ने अब ऐसा मोड़ ले लिया है, जिसने पूरे मामले की तस्वीर ही बदल दी है। शुरुआत में जिस घटना को लूट के इरादे से की गई हत्या माना जा रहा था, अब वही मामला साफ तौर पर साजिशन हत्या के रूप में सामने आ रहा है। पुलिस की ताजा विवेचना में कई ऐसे तथ्य मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि यह वारदात अचानक नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे पूरी प्लानिंग थी। सबसे बड़ा खुलासा उस बोलेरो को लेकर हुआ है, जिससे आरोपी अजय प्रताप फरार हुआ था और बाद में थाने पहुंचकर आत्मसमर्पण किया था।

बोलेरो लूटी नहीं गई थी, ड्राइवर ने खुद सौंपी थी चाबी

पुलिस अधीक्षक कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, शुरुआती एफआईआर में हत्या के साथ लूट की धाराएं भी जोड़ी गई थीं, क्योंकि आरोपी वारदात के बाद बोलेरो लेकर भागा था। यही माना गया कि वाहन भी लूटा गया है। लेकिन फॉरेंसिक जांच, सीसीटीवी फुटेज और पूछताछ के दौरान जो सच सामने आया, उसने पुलिस की शुरुआती थ्योरी को पूरी तरह बदल दिया। जांच में पता चला कि यह बोलेरो जबरन नहीं छीनी गई थी, बल्कि प्लांट के उप महाप्रबंधक सुधीर गुप्ता के चालक ने कथित तौर पर साजिश के तहत खुद आरोपी अजय प्रताप को उसकी चाबी सौंपी थी। इस खुलासे के बाद पुलिस ने मुकदमे से लूट से जुड़ी धाराएं हटा दी हैं और उनकी जगह आपराधिक षड्यंत्र की धाराएं जोड़ दी हैं।

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ड्राइवर समेत कई लोग रडार पर, बोलेरो बनी अहम सबूत

इस मामले में अब डीजीएम के चालक समेत दो अन्य लोगों को नामजद किया गया है। पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि साजिश की कड़ियों को जोड़ने के लिए हर एंगल से जांच की जा रही है। वारदात में इस्तेमाल हुई बोलेरो को भी बेहद अहम भौतिक साक्ष्य मानते हुए केस प्रॉपर्टी के रूप में जब्त कर लिया गया है। यह गाड़ी अब मुकदमे के अंतिम फैसले तक थाना परिसर के मालखाने में सुरक्षित रखी जाएगी। पुलिस को शक है कि इस वाहन की भूमिका केवल फरारी तक सीमित नहीं, बल्कि यह पूरे षड्यंत्र की अहम कड़ी साबित हो सकती है।

शिकायत पहले हुई, कार्रवाई बाद में भी नहीं हुई

इस पूरे हत्याकांड में पुलिस-प्रशासन की गंभीर लापरवाही भी अब सवालों के घेरे में है। रिकॉर्ड के मुताबिक, डीजीएम सुधीर गुप्ता ने घटना से पहले ही जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत देकर आरोपी अजय प्रताप से अपनी जान को खतरा बताया था। डीएम ने इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए क्षेत्राधिकारी स्तर से जांच के आदेश भी दिए थे, लेकिन इसके बाद दातागंज और उझानी सर्किल के सीओ के बीच क्षेत्राधिकार को लेकर मामला टलता रहा। सूत्रों के मुताबिक, आरोपी के स्थानीय विधायक से कथित करीबी संबंधों के चलते भी अधिकारी कार्रवाई से बचते रहे। नतीजा यह हुआ कि खतरे की चेतावनी के बावजूद समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया और मामला दोहरे हत्याकांड तक जा पहुंचा।

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तबादले, अटैचमेंट और अब सियासी कनेक्शन की जांच

हत्याकांड के बाद प्रशासन ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए सीओ दातागंज का तबादला बिल्सी कर दिया है, जबकि सीओ उझानी को पहले ही लखनऊ मुख्यालय से अटैच किया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि अब साजिश के हर पहलू, संभावित वित्तीय लेन-देन और आरोपी के राजनीतिक संपर्कों की गहराई से जांच की जा रही है। कोशिश यह है कि इस डबल मर्डर केस में सिर्फ शूटर या मुख्य आरोपी ही नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे से पूरी पटकथा लिखने वाले हर शख्स को कानून के दायरे में लाया जाए।

Location : 
  • Badaun

Published : 
  • 21 March 2026, 3:36 PM IST

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