वोटर लिस्ट से गायब हुए 26 नाम, बरेली में BLO के निलंबन और पूर्व प्रधान की भूमिका पर क्यों मचा है सियासी बवाल?

बरेली के शेरगढ़ ब्लॉक स्थित मोहम्मदपुर गांव में मतदाता सूची से 26 नाम हटाने के आरोप में बीएलओ नफीस मोहम्मद खां को निलंबित कर दिया गया है। वर्तमान प्रधान की IGRS शिकायत पर हुई जांच में प्रथम दृष्टया अनियमितता सामने आई। पूर्व प्रधान की कथित भूमिका की भी जांच हो रही है।

Post Published By: Pratibha Yadav
Updated : 4 November 2026, 6:28 PM IST
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Bareilly: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में मतदाता सूची से 26 लोगों के नाम हटाए जाने का मामला सामने आया है। शेरगढ़ ब्लॉक की ग्राम पंचायत मोहम्मदपुर में कथित अनियमितता के आरोप में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) और सहायक अध्यापक नफीस मोहम्मद खां को निलंबित कर दिया गया है। वर्तमान ग्राम प्रधान की शिकायत पर कराई गई जांच में प्रथम दृष्टया गड़बड़ी सामने आने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने यह कार्रवाई की है। वहीं, इस मामले में पूर्व प्रधान रेहान खां की कथित भूमिका और आर्थिक लेनदेन के आरोपों की भी जांच की जा रही है।

IGRS शिकायत के बाद सामने आया मामला

मोहम्मदपुर गांव के वर्तमान प्रधान राहुल गंगवार ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कंपोजिट स्कूल मोहम्मदपुर में तैनात सहायक अध्यापक नफीस मोहम्मद खां ने बीएलओ की जिम्मेदारी निभाते हुए पूर्व प्रधान रेहान खां के साथ मिलकर 26 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटवा दिए।

शिकायतकर्ता ने इस कार्रवाई के पीछे कथित सांप्रदायिक दुर्भावना और आर्थिक लेनदेन की आशंका भी जताई है। उनका कहना है कि इस तरह नाम हटाए जाने से संबंधित मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हुए हैं। मामले में वेद प्रकाश, हेमकाली, ललिता देवी, राकेश और ढाकन लाल समेत कई ग्रामीणों ने शपथ पत्र देकर अपनी आपत्तियां प्रशासन के सामने रखीं।

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जांच में 26 नाम हटाने का संतोषजनक आधार नहीं मिला

शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने एसडीएम और खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) स्तर पर तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की। जांच के दौरान बीएलओ से 26 मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आधार और संबंधित दस्तावेज मांगे गए।

आरोप है कि बीएलओ नाम हटाने के पीछे कोई ठोस साक्ष्य या संतोषजनक वैध कारण प्रस्तुत नहीं कर सके। जांच में मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में प्रथम दृष्टया अनियमितता सामने आने की बात कही गई। इसके बाद जांच रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को भेजी गई।

सहायक अध्यापक नफीस मोहम्मद खां निलंबित

जांच रिपोर्ट के आधार पर बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) डॉ. विनीता ने सहायक अध्यापक नफीस मोहम्मद खां को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि में उन्हें मीरगंज ब्लॉक के कंपोजिट स्कूल सहसा से संबद्ध किया गया है।

बीएसए ने विभागीय जांच के लिए खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) फतेहगंज पश्चिमी भानु शंकर गंगवार को जांच अधिकारी नामित किया है। उन्हें नियमानुसार आरोप पत्र तैयार कर बीएसए से अनुमोदन लेने और 15 दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

मतदाता सूची विवाद (Image: Dynamite News)

पूर्व प्रधान रेहान खां की भूमिका की भी जांच

मामले में पूर्व प्रधान रेहान खां पर बीएलओ के साथ मिलीभगत और कथित आर्थिक लेनदेन के आरोप लगाए गए हैं। प्रशासन अब इन आरोपों की भी पड़ताल कर रहा है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि मतदाताओं के नाम हटाने की कार्रवाई के पीछे किसी व्यक्ति का दबाव, व्यक्तिगत रंजिश, आर्थिक लेनदेन या सांप्रदायिक दुर्भावना थी या नहीं। हालांकि, पूर्व प्रधान की भूमिका और शिकायत में लगाए गए अन्य आरोपों की अभी पुष्टि नहीं हुई है। इनकी वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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डीएम अविनाश सिंह ने 15 दिन में रिपोर्ट मांगी

जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने बताया कि मोहम्मदपुर ग्राम पंचायत के प्रधान और ग्रामीणों की ओर से आईजीआरएस के माध्यम से शिकायत मिली थी। शिकायत पर तत्काल संज्ञान लेते हुए एसडीएम और बीडीओ से जांच कराई गई। जांच में अनियमितता सामने आने के बाद एसडीएम की रिपोर्ट चुनाव कार्यालय और बेसिक शिक्षा विभाग को भेजी गई।

डीएम के मुताबिक, बीएसए ने संबंधित सहायक अध्यापक को प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर निलंबित कर दिया है। विभागीय जांच के लिए बीईओ फतेहगंज पश्चिमी को जिम्मेदारी सौंपी गई है और 15 दिन में रिपोर्ट मांगी गई है। अन्य आरोपों की पड़ताल के लिए भी जांच कराई जा रही है।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जांच में यह भी देखा जाएगा कि मतदाताओं के नाम जानबूझकर हटाए गए थे या इसके पीछे कोई तकनीकी अथवा प्रक्रियागत चूक थी। यदि साजिशन और दुर्भावनापूर्ण तरीके से नाम हटाने की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

जांच रिपोर्ट से स्पष्ट होगी पूरी तस्वीर

फिलहाल बीएलओ का निलंबन इस मामले में हुई शुरुआती प्रशासनिक कार्रवाई है। अब विभागीय जांच और प्रशासनिक पड़ताल के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मतदाता सूची से 26 नाम हटाने के पीछे लापरवाही थी या कोई सुनियोजित साजिश। साथ ही पूर्व प्रधान की कथित भूमिका और आर्थिक लेनदेन के आरोपों पर भी जांच रिपोर्ट का इंतजार है।

Location :  Bareilly

Published :  4 November 2026, 6:28 PM IST

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