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उत्तर प्रदेश के बरेली में शिया समुदाय ने पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शिया मस्जिद पर हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की है। समुदाय के प्रतिनिधियों ने स्थानीय प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर भारत सरकार से इस गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की मांग की।
बरेली में शिया समुदाय का प्रदर्शन
Bareilly: उत्तर प्रदेश के बरेली में शिया समुदाय ने पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शिया मस्जिद पर हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की है। समुदाय के प्रतिनिधियों ने स्थानीय प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर भारत सरकार से इस गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान समुदाय के लोगों ने हमले के पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया।
ज्ञापन में 6 फरवरी 2026 को इस्लामाबाद स्थित खदीजा तुल कुबरा शिया मस्जिद में जुमे की नमाज के दौरान हुए आत्मघाती बम धमाके का उल्लेख किया गया है। इस हमले में 31 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जबकि 170 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। हमले की जिम्मेदारी ISIS जैसे चरमपंथी संगठन द्वारा ली गई है। इस घटना को शिया समुदाय के नेताओं ने मानवता के खिलाफ अपराध बताया है।
शिया समुदाय के प्रतिनिधियों ने कहा कि पाकिस्तान में शिया मुसलमानों पर लगातार लक्षित हमले हो रहे हैं, जो गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन का संकेत हैं। उन्होंने भारत सरकार से अपील की कि इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक मंचों पर मजबूती से उठाया जाए। साथ ही कूटनीतिक दबाव के माध्यम से पाकिस्तान सरकार को शिया समुदाय की सुरक्षा और उनके मौलिक अधिकार सुनिश्चित करने के लिए बाध्य किया जाए।
प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि यह ज्ञापन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि मानवता, न्याय और शांति के समर्थन में सौंपा गया है। उन्होंने सभी आतंकी घटनाओं की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी निंदा करने की मांग की और उम्मीद जताई कि भारत सरकार इस विषय पर त्वरित एवं सहानुभूतिपूर्ण कदम उठाएगी।
बरेली में हुआ यह विरोध मेरठ, बदायूं, मुरादाबाद और जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में शिया समुदाय द्वारा किए जा रहे प्रदर्शनों की कड़ी का हिस्सा है। इन स्थानों पर भी पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों, विशेषकर शिया समुदाय की सुरक्षा को लेकर आवाज बुलंद की जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम उठाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है।