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बांदा के एक केस में बच्चों की पोर्नोग्राफी के आरोप में आरोपी निलंबित जेई और उसकी पत्नी को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है। यह केस इंटरनेशनल स्तर का था, जिसमें बच्चों की तस्वीरें और वीडियो डार्क वेब पर फैलाई जा रही थी। जांच में पता चला कि आरोपी का नेटवर्क विदेशों तक फैला था। कोर्ट ने दोनों को मौत की सजा और पीड़ित बच्चों को मुआवजा देने का आदेश दिया है।
बांदा कोर्ट
Banda: बांदा में क्राइम का खौफनाक चेहरा सामने आया है, जब एक चाइल्ड पोर्नोग्राफी मामले में आरोपी निलंबित जेई और उसकी पत्नी को कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई है। इस केस ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है, क्योंकि इसमें इंटरनेशनल स्तर पर बच्चों की तस्वीरें और वीडियो बनाई गई थी, जो सोशल मीडिया और डार्क वेब के जरिए दुनियाभर में फैलाए गए थे। मामला इतना भयानक और संगीन था कि सीबीआई की टीम भी खुद इस केस की जांच में जुटी थी। खबर का शुरुआत ही खौफनाक है, जहां एक ओर बच्चों की सुरक्षा का दावा किया जाता है, वहीं दूसरी ओर इन जघन्य अपराधों ने साबित कर दिया है कि समाज में अभी भी कितनी खतरनाक परतें छुपी हैं।
क्राइम का खुलासा और जांच का मोड़
यह पूरा मामला 2020 में सामने आया, जब इंटरपोल ने सीबीआई को सूचना दी कि बच्चों की पोर्न वीडियो बनाकर सोशल साइट्स और डार्क वेब पर डालने का काम चल रहा है। इस केस की जड़ें इंटरनेशनल स्तर पर थी, जिसमें 47 देशों में बच्चों की तस्वीरें और वीडियो पाए गए। जांच के दौरान पता चला कि यह वीडियो खासतौर पर बुंदेलखंड के बांदा और चित्रकूट जिलों के बच्चों के थे। इन वीडियो को बनाने और अपलोड करने का नेटवर्क काफी बड़ा था। आरोपी रामभवन (सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर जेई) और उसकी पत्नी दुर्गावती दोनों ही इस जघन्य अपराध के मुख्य आरोपी थे। जब से इस केस की जांच शुरू हुई, तब से ही इसने पूरे देश के होश उड़ा दिए।
सीबीआई की टीम का दबाव और जांच का परिणाम
सीबीआई ने इस मामले में गहन जांच की। इलेक्ट्रॉनिक सबूत, वैज्ञानिक साक्ष्य और गवाहों के बयानों के आधार पर इस जघन्य अपराध का पर्दाफाश हुआ। जांच में पता चला कि आरोपी छोटे-छोटे बच्चों की तस्वीरें और वीडियो बनाकर विदेशी पोर्न साइट्स, सोशल मीडिया और डार्क वेब पर अपलोड कर रहे थे। इसके पीछे का मकसद पैसों का लेनदेन था, और इसमें शामिल लोगों का नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय था। अदालत ने इस जघन्य अपराध को गंभीरता से लिया और आरोपी पति-पत्नी दोनों को मौत की सजा सुनाई। इसके साथ ही पीड़ित बच्चों के परिजनों को 10-10 लाख रुपए का मुआवजा भी दिया गया, जिससे उन्हें इस दर्दनाक हादसे के बाद कुछ हिम्मत मिल सके।
बांदा के विशेष पॉक्सो कोर्ट ने इस मामले में कड़ा संदेश दिया है कि बच्चे सुरक्षित हैं और ऐसे जघन्य अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा। आरोपी पति-पत्नी को फांसी की सजा सुनाई गई है, और यह फैसला समाज के लिए एक चेतावनी है कि बच्चों के साथ अपराध करने वाले कभी भी बख्शे नहीं जाएंगे। यह सजा न केवल अपराधियों को दंडित करने का काम है, बल्कि समाज में इस तरह के अपराधों के प्रति जागरूकता फैलाने का भी संदेश है। इस तरह के मामलों में तेजी से कार्रवाई और कठोरतम सजा का मिलना जरूरी है, ताकि अपराधियों में डर बैठे और कोई भी ऐसा घिनौना काम करने की हिम्मत न करे।