एक फर्जी इनवॉइस ने डुबो दिए 14 लाख! बलरामपुर के कारोबारी के साथ हुई बड़ी साइबर ठगी, अब शुरू हुई जांच
बलरामपुर के एक सरिया कारोबारी को व्हाट्सएप पर आया टैक्स इनवॉइस असली लगा, लेकिन रकम भेजने के बाद ऐसा खुलासा हुआ जिसने सबको चौंका दिया। करीब 14.45 लाख रुपये की इस साइबर ठगी में फर्जी दस्तावेज और डिजिटल लेनदेन का इस्तेमाल होने का आरोप है।
फर्जी टैक्स इनवॉइस के जाल में फंसे थोक कारोबारी (Img: AI Generate Image)
Balrampur: जिले में फर्जी टैक्स इनवॉइस का इस्तेमाल कर एक सरिया व्यापारी से लाखों रुपये की साइबर धोखाधड़ी का एक गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित कारोबारी की तहरीर पर साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने संबंधित कंपनी और उसके कुछ नामजद अधिकारियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर मामले की छानबीन शुरू कर दी है।
जानें क्या है पूरा मामला?
पूरा मामला नगर कोतवाली क्षेत्र के उतरौला रोड स्थित भगवतीगंज के रहने वाले रविन्द्र कुमार गुप्ता से जुड़ा है, जो पीकेआरजी इंफ्रा बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक हैं। उनकी कंपनी मुख्य रूप से सरिया के थोक व्यापार का काम करती है। उन्होंने व्यापार के सिलसिले में बीती 7 जुलाई 2026 को शाकंभरी इस्पात एंड पावर लिमिटेड नाम की कंपनी को एलीगेंट टीएमटी बार खरीदने के लिए एक परचेज ऑर्डर जारी किया था।
आरोप है कि इसके बाद 10 जुलाई को शाकंभरी इस्पात कंपनी की तरफ से व्हाट्सएप पर एक टैक्स इनवॉइस भेजा गया। इस बिल को असली मानते हुए रविन्द्र कुमार गुप्ता ने अगले ही दिन यानी 11 जुलाई को आरटीजीएस, एनईएफटी और आईएमपीएस जैसे डिजिटल माध्यमों से कुल 14,45,918 रुपये कंपनी के पंजाब नेशनल बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए।
पूरी रकम भेजने के बाद जब मामले की गहराई से जांच की गई तो धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। पता चला कि व्हाट्सएप पर भेजा गया वह टैक्स इनवॉइस पूरी तरह फर्जी और जाली था। इतना ही नहीं, नियमानुसार 50 हजार रुपये से अधिक के सामान की बिक्री पर जो ई-वे बिल अनिवार्य होता है, वह भी उस इनवॉइस के साथ नहीं जोड़ा गया था। पीड़ित ने आरोप लगाया है कि सोची-समझी साजिश के तहत फर्जी दस्तावेज तैयार करके उनके लाखों रुपये हड़प लिए गए हैं।
निदेशक रविन्द्र कुमार गुप्ता ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में शाकंभरी इस्पात कंपनी के मार्केटिंग और सेल्स विभाग से जुड़े कुछ अधिकारियों को भी नामजद किया है। उनका कहना है कि इन अधिकारियों ने पहले उनका भरोसा जीता और फिर मिलीभगत कर फर्जी इनवॉइस भेजकर इस बड़ी साइबर ठगी को अंजाम दिया।
फिलहाल साइबर थाना पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले से जुड़े बैंकिंग लेन-देन के रिकॉर्ड, टैक्स इनवॉइस, ई-वे बिल और अन्य डिजिटल व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को कब्जे में लेकर उनकी बारीकी से पड़ताल की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।