अयोध्या में दिखी रामकथा की वैश्विक झलक, श्रीलंका से दक्षिण अफ्रीका तक के कलाकारों ने बांधा समां

अयोध्या के रामकथा पार्क में दीपोत्सव की सांस्कृतिक संध्या पर श्रीलंका, दक्षिण अफ्रीका समेत देश-विदेश के कलाकारों ने रामलीला और लोकनृत्य से समां बांधा।

Post Published By: Ramdev Gupta
Updated : 8 November 2026, 12:20 PM IST
google-preferred

Ayodhya: अयोध्या के दीपोत्सव की सांस्कृतिक संध्या में, रामकथा पार्क का मंच भारतीय लोककलाओं और विश्व की सांस्कृतिक परंपराओं के सुंदर मिलन का साक्षी बना। रामकथा पार्क में, भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ श्रीलंका और दक्षिण अफ्रीका से आए कलाकारों ने रामायण के कई रूपों की शानदार प्रस्तुतियां दीं। इस दौरान लोकनृत्य, संगीत, शास्त्रीय गायन और पारंपरिक रामलीला के माध्यम से, रामकथा पार्क के कलाकारों ने दर्शकों को मोहित कर दिया।

असम से तक के कलाकारों ने किया रामलीला का मंचन

गुवाहाटी असम की कीर्तन फाउंडेशन ने 'रघुनन्दना' और 'राम विजय' का आयोजन किया और जम्मू और कश्मीर से ब्रिज कला केंद्र के कलाकारों ने डोगरी भाषा में एक रामलीला का मंचन किया। और केरल के कलामंडलम लीलाम्मा मेमोरियल कल्चरल ट्रस्ट ने 'रामायण-सांस्कृतिक यात्रा' के जरिए अपनी कला और परंपरा का परिचय दिया।

उत्तराखंड के विनीत बिष्ट और लक्ष्मी भंडार की पारंपरिक रामलीला को भी दर्शकों का खूब सराहा तो वहीं, बंगाल के बंशी नाथ ढकुआ ने अपनी रामलीला प्रस्तुति से पूरे क्षेत्र के सांस्कृतिक संध्या को रंगों से भर दिया।

ayodhya diwali

अयोध्या राम मंदिर(img: X)

विदेश से आये कलाकारों ने भी किया मंचन

कार्यक्रम में श्रीलंका और दक्षिण अफ्रीका से आए कलाकारों की प्रस्तुतियां सबका ध्यान खींचती रहीं। इन कलाकारों ने अपने देशों में चली आ रही रामायण की सांस्कृतिक परंपराओं को रामलीला के रूप में मंच पर पेश किया। उनकी प्रस्तुतियों से साफ दिखा कि रामकथा भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि कई देशों की सांस्कृतिक पहचान में शामिल है।

मंचन के दौरान लखनऊ के भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय की ओर से कथक आधारित रामायण की प्रस्तुति दी गई। कलाकारों ने कथक की पारंपरिक भाव-भंगिमाओं और नृत्य शैली के माध्यम से भगवान राम की जीवन यात्रा को जीवंत किया। शास्त्रीय नृत्य के इस अनूठे संगम ने कार्यक्रम में भारतीय कला परंपरा की खूबसूरती को सामने रखा।

कलाकारों ने बांधा समां

असम से केरल, जम्मू-कश्मीर से बंगाल और उत्तराखंड से लेकर विदेशों तक के कलाकारों की प्रस्तुतियों ने रामायण की व्यापक सांस्कृतिक पहुंच को रेखांकित किया। अलग-अलग भाषाओं, लोककलाओं और नाट्य शैलियों में प्रस्तुत एक ही रामकथा ने रामकथा पार्क की सांस्कृतिक संध्या को यादगार बना दिया।

Location :  ayodhya

Published :  8 November 2026, 12:20 PM IST

Advertisement