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मामले से जुड़ी केस डायरी मांगी (रांची कोर्ट)
Ranchi: शनिवार को अतिरिक्त न्यायिक आयुक्त योगेश कुमार की अदालत में कृष्ण कुमार, मुकेश साहू, दिलीप कुमार राणा और ओमप्रकाश राणा की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई हुई। ये सभी JPSC 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा से जुड़े धोखाधड़ी के मामले में फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
अदालत ने इस मामले से जुड़ी केस डायरी मांगी है। इसके अलावा, तीन आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के लिए 10 नवंबर की तारीख तय की गई है, जबकि कृष्ण कुमार की याचिका पर सुनवाई 21 नवंबर को होगी।
इन जमानत याचिकाओं पर अगली सुनवाई 7 नवंबर को होगी। जांच के अनुसार, ये लोग कथित तौर पर बुद्धेश्वर भगत से जुड़े हैं, जो अभय तिवारी द्वारा चलाए जा रहे एक सिंडिकेट का एजेंट है। अभय तिवारी को ही इस परीक्षा घोटाले का मास्टरमाइंड माना जा रहा है।
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गौरतलब है कि CID ने पिछले महीने इन चार लोगों को गिरफ्तार किया था और तब से वे जेल में हैं। इसी बीच, उसी अदालत ने सुरेश राय और सुधाकर कुमार की जमानत याचिकाओं पर भी सुनवाई की, जिन पर JSSC-CGL परीक्षा में गड़बड़ियां कराने का आरोप है। इस मामले में भी, अदालत ने CID से केस डायरी मांगी है। इन याचिकाओं पर अगली सुनवाई 10 नवंबर और 25 नवंबर को होनी है।
सुरेश राय पर आरोप है कि उसने बोकारो जिले के दुग्धा स्थित अपने घर पर 30 से अधिक उम्मीदवारों को परीक्षा के सवाल और उनके जवाब रटवाए थे। जांच के दौरान, CID को ऐसे सबूत मिले हैं जिनसे पता चलता है कि 22 जनवरी 2026 को उसके बैंक खाते में रूपये 14 लाख जमा किए गए थे। इसके अलावा, यह भी सामने आया है कि उसी दिन उसके बेटे, उमेश राय के खाते में 5 लाख रूपये जमा किए गए थे। CID ने 10 अक्टूबर को सुरेश राय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इस मामले में उनके बेटे उमेश राय और दामाद दीपक कुमार को भी गिरफ्तार किया गया है।
शनिवार को रांची में अतिरिक्त न्यायिक आयुक्त योगेश कुमार की अदालत में मोहम्मद उस्मान की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। वह 14वीं JPSC परीक्षा धोखाधड़ी मामले के सिलसिले में फिलहाल जेल में है।
सुनवाई के बाद अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। फैसला 10 नवंबर को सुनाया जाएगा। CID ने इस मामले में आरोपी को 22 जुलाई को गिरफ्तार किया था।
आरोप है कि वह परीक्षा धोखाधड़ी के मास्टरमाइंड अभय तिवारी के सिंडिकेट से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता के वकील सोनल तिवारी ने दलील दी कि धोखाधड़ी के आरोपों को साबित करने के लिए यह दिखाना जरूरी है कि इसमें धोखा देना या उकसाना, जाली दस्तावेज तैयार करना, और साझा आपराधिक इरादा या समझौता शामिल था—ये सभी तत्व मिलकर एक आपराधिक साजिश का निर्माण करते हैं।
केवल किसी दूसरे आरोपी के संपर्क में होना या उसे जानना, अपने आप में आपराधिक साजिश का सबूत नहीं माना जा सकता। गौरतलब है कि CID ने अपनी जांच पूरी कर ली है और चार्जशीट भी दाखिल कर दी है।
Location : Ranchi
Published : 8 November 2026, 12:14 PM IST