गन्ना आवंटन में ‘भेदभाव’ पर हाईकोर्ट सख्त: यदु शुगर मिल की याचिका मंजूर, आयुक्त को दिया बड़ा आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चीनी मिलों को गन्ना आवंटित करने के मामले में अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि मिलों को उनकी अनुमानित जरूरत के अनुसार पर्याप्त गन्ना मिलना चाहिए, ताकि पेराई का काम लगातार चलता रहे और किसानों को भी समय पर भुगतान हो सके।

Post Published By: Komal Chauhan
Updated : 11 September 2026, 5:51 PM IST
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Allahabad: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बदायूं के बिसौली स्थित यदु शुगर लिमिटेड की याचिका को मंजूर कर लिया है। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने गन्ना आवंटन में असमानता पर कड़ा रुख अपनाया।

कोर्ट ने गन्ना आयुक्त को निर्देश दिया है कि वर्ष 2026-27 के पेराई सत्र में यदु शुगर मिल को उसकी अनुमानित जरूरत के अनुसार पर्याप्त गन्ना आवंटित किया जाए। इसके साथ ही मिल को करीब 180 दिन तक निर्बाध रूप से चलाने के लिए पेराई कैलेंडर तैयार करने का भी आदेश दिया गया है।

जरूरत 100.80 लाख क्विंटल, मिला सिर्फ 51.30 लाख

याचिका में यदु शुगर मिल की ओर से बताया गया कि 2026-27 के पेराई सत्र के लिए उसकी अनुमानित गन्ने की जरूरत 100.80 लाख क्विंटल थी। हालांकि, मिल को सिर्फ 51.30 लाख क्विंटल गन्ना आवंटित किया गया। यह उसकी अनुमानित जरूरत का करीब 50.89 प्रतिशत ही था।

मिल ने कोर्ट में यह भी बताया कि इसी क्षेत्र की सात अन्य चीनी मिलों को उनकी अनुमानित जरूरत का 100 प्रतिशत से लेकर 190.92 प्रतिशत तक गन्ना आवंटित किया गया। इस अंतर को लेकर मिल ने हाईकोर्ट का रुख किया था।

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कम गन्ना मिलने से प्रभावित हुआ संचालन

कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि कम गन्ना आवंटित किए जाने की वजह से यदु शुगर मिल को पर्याप्त मात्रा में गन्ने की आपूर्ति नहीं हो सकी। इसका सीधा असर मिल के संचालन पर पड़ा और वह लगातार पेराई नहीं कर पाई।

अदालत के सामने पेश आंकड़ों के मुताबिक गन्ने की कमी के कारण मिल के संचालन पर 786.19 घंटे का असर पड़ा। वहीं, मिल की वास्तविक पेराई अवधि केवल 784.44 घंटे रही। इससे साफ हुआ कि पर्याप्त गन्ना उपलब्ध नहीं होने के कारण मिल को समय से पहले अपना संचालन बंद करना पड़ा।

परिवहन में होने वाले नुकसान का भी रखा ध्यान

हाईकोर्ट ने गन्ना आयुक्त की 2 सितंबर 2025 की नीति का भी उल्लेख किया। इस नीति में परिवहन के दौरान गन्ने में न्यूनतम 40 प्रतिशत नुकसान होने की बात स्वीकार की गई है।कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में केवल कागज पर दर्ज अनुमानित जरूरत के बराबर गन्ना आवंटित करना पर्याप्त नहीं है। परिवहन के दौरान होने वाले संभावित नुकसान को भी ध्यान में रखते हुए वास्तविक जरूरत के मुताबिक गन्ने का आवंटन किया जाना चाहिए।

मिल की कार्यप्रणाली को नहीं माना जिम्मेदार

अदालत ने स्पष्ट किया कि यदु शुगर मिल के समय से पहले बंद होने की मुख्य वजह उसका खराब संचालन या किसानों को भुगतान करने में अनुचित देरी नहीं थी। कोर्ट के अनुसार, कम गन्ना आवंटन और उसकी पर्याप्त आपूर्ति न होना मिल के संचालन में आई समस्या की प्रमुख वजह रही। इस आधार पर कोर्ट ने गन्ना आयुक्त को निर्देश दिया कि 100.80 लाख क्विंटल की अनुमानित जरूरत को आधार बनाया जाए और परिवहन के दौरान संभावित 40 प्रतिशत नुकसान को ध्यान में रखते हुए मिल को पर्याप्त गन्ना उपलब्ध कराया जाए।

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किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश

हाईकोर्ट ने यदु शुगर मिल को भी निर्देश दिया है कि उसे आवंटित गन्ने की उचित खरीद और उपयोग सुनिश्चित करना होगा। इसका उद्देश्य यह है कि पेराई का काम सुचारू रूप से चलता रहे और किसानों को उनके गन्ने का भुगतान समय पर मिल सके।

Location :  Allahabad

Published :  11 September 2026, 5:51 PM IST

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