डेढ़ साल तक बने रहे संबंध, फिर नहीं हुई शादी; हाई कोर्ट ने कहा- हर टूटा हुआ वादा…

शादी के वादे, प्रेम संबंध और बाद में हुए विवाद से जुड़े एक मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। आखिर कोर्ट ने किन तथ्यों को सबसे अहम माना और क्यों पूरी कार्यवाही रद्द कर दी? फैसले की वजह जानकर आप भी हैरान हो सकते हैं।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 18 June 2026, 8:17 PM IST
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Prayagraj: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक ऐसे मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिस पर कानूनी जानकारों से लेकर आम लोगों तक की नजर बनी हुई थी। अदालत ने कानपुर नगर के एक युवक के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म का मुकदमा रद्द करते हुए कहा कि लंबे समय तक सहमति से बने शारीरिक संबंधों को केवल इस आधार पर दुष्कर्म नहीं माना जा सकता कि बाद में शादी नहीं हो पाई।

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि शादी का वादा पूरा न होना और शुरू से ही झूठा वादा करके संबंध बनाना, दोनों अलग-अलग परिस्थितियां हैं। हर मामले को उसके तथ्यों के आधार पर देखा जाना चाहिए।

फेसबुक से शुरू हुई दोस्ती

मामले के अनुसार, पीड़िता ने मार्च 2024 में कानपुर के गुजैनी थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि उसकी पहचान फेसबुक के माध्यम से युवक से हुई थी। बातचीत धीरे-धीरे प्रेम संबंध में बदल गई। पीड़िता का आरोप था कि युवक ने शादी का भरोसा दिलाया और इसके बाद दोनों के बीच कई बार शारीरिक संबंध बने। बाद में युवक ने शादी करने से इनकार कर दिया और किसी दूसरी युवती से विवाह कर लिया। इसके बाद पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

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अदालत ने किन बातों पर दिया ध्यान?

सुनवाई के दौरान अदालत ने केस से जुड़े दस्तावेजों और बयानों का विस्तार से अध्ययन किया। कोर्ट ने पाया कि पीड़िता ने अपने बयान में स्वीकार किया था कि दोनों के बीच संबंध उसकी सहमति से बने थे। अदालत ने यह भी माना कि शिकायतकर्ता वयस्क थी और अपने फैसले लेने में सक्षम थी। साथ ही, एफआईआर में पहली बार संबंध बनने की तारीख, स्थान और समय जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं थीं।

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि मुकदमा उस समय दर्ज कराया गया, जब पीड़िता को युवक के विवाह संबंधी कार्यक्रम की जानकारी मिली।

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सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी दिया हवाला

न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने अपने आदेश में सर्वोच्च न्यायालय के कई पुराने फैसलों का उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति का शुरू से धोखा देने का इरादा साबित नहीं होता और बाद में किसी कारण से शादी नहीं हो पाती, तो केवल वादा टूट जाने को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। कोर्ट के अनुसार, दुष्कर्म का अपराध तब बनता है जब यह साबित हो कि शुरुआत से ही झूठे वादे के जरिए सहमति हासिल की गई थी। सभी तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद हाई कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ चल रही पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

Location :  Prayagraj

Published :  18 June 2026, 8:17 PM IST

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