AI डीपफेक पर प्रीति जिंटा का बड़ा एक्शन: गूगल और मेटा पर केस करने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट से मिली हरी झंडी

बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रीति जिंटा को बॉम्बे हाईकोर्ट से AI डीपफेक कंटेंट के खिलाफ गूगल और मेटा जैसी कंपनियों पर केस करने की मंज़ूरी मिल गई है। प्रीति का आरोप है कि उनके चेहरे और छवि का गलत इस्तेमाल कर उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई गई है।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 18 June 2026, 9:58 AM IST
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Mumbai: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग के खिलाफ बॉलीवुड ने एक बार फिर कानूनी मोर्चा खोल दिया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने मशहूर फिल्म अभिनेत्री प्रीति जिंटा को टेक दिग्गज 'गूगल एलएलसी' (Google LLC), 'मेटा' (Meta Platforms) और कई अन्य वेबसाइटों के खिलाफ दीवानी मुकदमा (Civil Suit) दायर करने की आधिकारिक अनुमति दे दी है।

अभिनेत्री का आरोप है कि इन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद एआई-जेनरेटेड डीपफेक मटीरियल न सिर्फ उनकी निजता का हनन कर रहा है, बल्कि उनके कॉपीराइट और लंबे समय से बनी सामाजिक प्रतिष्ठा (Goodwill) को भी भारी नुकसान पहुंचा रहा है।

कानूनी तकनीकी बाधा पार, जस्टिस आहूजा का फैसला

हाईकोर्ट के जस्टिस अभय आहूजा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए लेटर्स पेटेंट के 'क्लॉज़ XII' (Clause XII) के तहत प्रीति जिंटा की लीव पिटीशन (याचिका) को मंज़ूर कर लिया। तकनीकी रूप से यह एक बेहद महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक आवश्यकता थी, क्योंकि इस मामले से जुड़े कई प्रतिवादी (जैसे गूगल और मेटा) और उल्लंघन से जुड़ी कुछ गतिविधियां बॉम्बे हाईकोर्ट के भौगोलिक अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) से बाहर की थीं। अदालत से यह मंज़ूरी मिलने के बाद अब प्रीति जिंटा के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट के ओरिजिनल साइड पर एक बड़ा कानूनी केस दर्ज करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

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पर्सनैलिटी और मोरल राइट्स के उल्लंघन का गंभीर आरोप

प्रीति जिंटा द्वारा तैयार मसौदे के अनुसार, इंटरनेट पर मौजूद कई डिजिटल डिफेंडेंट्स ने उनकी अनुमति के बिना उनके नाम, चेहरे और आवाज का इस्तेमाल किया। इसके जरिए कथित तौर पर एआई-जेनरेटेड डीपफेक वीडियो, भ्रामक मीम्स, छेड़छाड़ की गई तस्वीरें (Manipulated Images) और यहां तक कि उनके व्यक्तित्व पर आधारित चैटबॉट पर्सोना बनाकर शेयर किए जा रहे हैं। अभिनेत्री का तर्क है कि यह सीधा-सीधा उनके पर्सनैलिटी राइट्स, कॉपीराइट एक्ट 1957 की धारा 62 के तहत उनके नैतिक अधिकारों का उल्लंघन है, जिससे उनकी छवि धूमिल हो रही है।

मुंबई में केस चलाने के पीछे की वजह

अदालत में दलील दी गई कि भले ही यह आपत्तिजनक और फर्जी सामग्री ऑनलाइन माध्यमों से पूरी दुनिया में फैल रही हो, लेकिन प्रीति जिंटा एक भारतीय नागरिक हैं जो मुख्य रूप से मुंबई में रहती हैं और यहीं से अपना व्यवसाय व काम करती हैं। उनकी वैश्विक गुडविल और छवि का केंद्र भी यही शहर है, इसलिए नुकसान की भरपाई और कानूनी कार्रवाई का अधिकार भी इसी अदालत के क्षेत्र में आता है। चूंकि डिजिटल क्राइम का असर शहर के भीतर और बाहर दोनों जगह हो रहा था, इसलिए क्लॉज़ XII के तहत विशेष अनुमति मांगी गई थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

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कोर्ट में अब स्वतंत्र रूप से चलेगा मुख्य मुकदमा

जस्टिस आहूजा द्वारा दलीलें स्वीकार किए जाने के बाद अब इन कथित डीपफेक सामग्रियों के प्रसार पर तुरंत रोक लगाने (Injunction) और हर्जाने की मांग करने वाला मुख्य दीवानी मुकदमा स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ेगा। अदालत में अभिनेत्री प्रीति जिंटा का पक्ष प्रसिद्ध वकील एडवोकेट रोहन कदम ने रखा, जिन्हें इस केस के लिए लॉ फर्म 'बी मुनीम एंड कंपनी' द्वारा ब्रीफ किया गया था। इस मामले के सामने आने के बाद एआई रेगुलेशन और सेलिब्रिटी राइट्स को लेकर एक बार फिर नई बहस छिड़ गई है।

Location :  Mumbai

Published :  18 June 2026, 9:58 AM IST

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