बीमार बाप तड़पता रहा, बेटे नहीं आए… पड़ोसियों ने भेजा फ्लाइट का किराया, फिर भी नहीं पसीजा दिल

कानपुर के शास्त्रीनगर में एक बुजुर्ग पिता की दर्दनाक कहानी सामने आई है। बीमारी से जूझ रहे संतोष सिंह अपने बेटों का इंतजार करते रहे, लेकिन दोनों बेटों ने घर आना जरूरी नहीं समझा। पड़ोसियों ने इलाज के लिए पैसे दिए, अस्पताल ले गए और आखिर में अंतिम संस्कार भी कराया। इस घटना ने रिश्तों की संवेदनाओं और बुजुर्गों की उपेक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 23 May 2026, 2:38 PM IST
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Kanpur: कानपुर के शास्त्रीनगर से एक ऐसी दर्दनाक कहानी सामने आई है जिसने रिश्तों की संवेदनाओं पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जिस पिता ने जिंदगीभर मेहनत करके अपने दोनों बेटों को पढ़ाया-लिखाया, उन्हें अपने पैरों पर खड़ा किया, उसी पिता ने अंतिम समय में बेटों का इंतजार करते-करते दम तोड़ दिया। हालत इतनी दुखद रही कि बीमारी की खबर मिलने और बार-बार बुलाने के बावजूद बेटे घर नहीं पहुंचे। पड़ोसियों ने इलाज के लिए दौड़भाग की, पैसे दिए, एंबुलेंस का इंतजाम किया, लेकिन बेटों ने जिम्मेदारी निभाने के बजाय दूरी बना ली। आखिरकार पिता की मौत के बाद मोहल्ले वालों और रिश्तेदारों ने उनका अंतिम संस्कार कराया।

शास्त्रीनगर में अकेले रह रहे थे बुजुर्ग दंपती

पूरा मामला कानपुर के शास्त्रीनगर इलाके का है। जवाहर पार्क के पास रहने वाले 60 वर्षीय संतोष सिंह अपनी पत्नी रंजीत कौर के साथ रहते थे। पड़ोसियों के मुताबिक संतोष सिंह के दो बेटे हैं। बड़ा बेटा जोगिंदर सिंह उर्फ सन्नी गुजरात में रहकर प्राइवेट नौकरी करता है, जबकि उसकी पत्नी दुबई में रहती है। छोटा बेटा लकी लखनऊ में रहता है।

कुत्ते के काटने के बाद बिगड़ने लगी हालत

रंजीत कौर ने बताया कि करीब तीन महीने पहले संतोष सिंह को कुत्ते ने काट लिया था। उस समय उन्हें इंजेक्शन लगवाए गए थे, लेकिन पिछले आठ दिनों से उनकी तबीयत लगातार बिगड़ने लगी। धीरे-धीरे उनकी हालत गंभीर होती चली गई। पड़ोसी वेद प्रकाश राठौर ने बताया कि उन्होंने बड़े बेटे सन्नी को फोन कर पिता की हालत के बारे में जानकारी दी और तुरंत कानपुर आने के लिए कहा। सन्नी ने पैसे न होने की बात कही, जिसके बाद पड़ोसी ने इंसानियत दिखाते हुए उसके खाते में 12 हजार रुपये भेज दिए ताकि वह फ्लाइट से तुरंत यहां पहुंच सके।

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शहर आया बेटा, लेकिन घर नहीं पहुंचा

पड़ोसियों का कहना है कि पैसे मिलने के बाद सन्नी कानपुर तो आ गया, लेकिन घर नहीं पहुंचा। बाद में पता चला कि वह फजलगंज के एक होटल में रुका हुआ है। पड़ोसियों ने वहां जाकर भी उसे पिता की गंभीर हालत के बारे में बताया और घर चलने के लिए कहा, लेकिन वह फिर भी नहीं आया। इस दौरान संतोष सिंह की हालत लगातार खराब होती जा रही थी। मोहल्ले के लोग और रिश्तेदार उम्मीद कर रहे थे कि बेटा आएगा और पिता को अस्पताल ले जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

पड़ोसियों ने डीएम से लगाई गुहार

जब संतोष सिंह की हालत ज्यादा बिगड़ने लगी तो पड़ोसी कृष्ण कुमार सिंह ने 20 मई को जिलाधिकारी को अर्जी देकर इलाज कराने की गुहार लगाई। इसके बाद वे संतोष सिंह को हैलट अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया लेकिन तीमारदारी के लिए किसी परिजन को बुलाने को कहा। पड़ोसियों को उम्मीद थी कि अगले दिन तक बेटा पहुंच जाएगा, इसलिए वे संतोष सिंह को वापस घर ले आए। लेकिन अगले दिन भी बेटा नहीं आया।

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फोन बंद कर गायब हो गया बेटा

पड़ोसियों ने बताया कि जब दोबारा डीएम से मदद मांगी गई तो उन्होंने एक निजी मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए पत्र जारी किया। शुक्रवार सुबह संतोष सिंह को वहां ले जाने की तैयारी की गई। इस दौरान सन्नी को लगातार फोन किए गए, लेकिन वह हर बार 10-15 मिनट या आधे घंटे में आने की बात कहता रहा। बाद में उसने अपना मोबाइल फोन ही स्विच ऑफ कर लिया। सरकारी एंबुलेंस बुलाने की कोशिश की गई, लेकिन चालक ने निजी अस्पताल तक मरीज ले जाने से मना कर दिया। इसके बाद पड़ोसियों ने निजी एंबुलेंस का इंतजाम किया, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही संतोष सिंह की सांसें थम गईं।

मोहल्ले वालों ने कराया अंतिम संस्कार

संतोष सिंह की मौत के बाद भी उनके बेटे नहीं पहुंचे। सूचना मिलने पर संतोष सिंह के साले हरभजन सिंह मौके पर पहुंचे। इसके बाद मोहल्ले के लोगों ने मिलकर उनका पार्थिव शरीर भैरोघाट विद्युत शवदाह गृह पहुंचाया, जहां अंतिम संस्कार किया गया। इस पूरी घटना ने इलाके के लोगों को भावुक कर दिया। पड़ोसियों का कहना है कि जिस पिता ने जिंदगीभर अपने बच्चों के लिए मेहनत की, वही पिता आखिरी समय में बेटों का चेहरा देखने के लिए तरसता रह गया।

Location :  Kanpur

Published :  23 May 2026, 2:36 PM IST

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