1 जून से बड़ा बदलाव! 16 साल से कम उम्र के बच्चे नहीं बना सकेंगे सोशल मीडिया अकाउंट

मलेशिया सरकार 1 जून से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सख्त नियम लागू करेगी। नए कानून के तहत Meta, TikTok और YouTube जैसी कंपनियों को एज वेरिफिकेशन, कंटेंट मॉडरेशन और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।

Updated : 23 May 2026, 2:48 PM IST
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New Delhi: मलेशिया सरकार अब बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बड़ा और सख्त कदम उठाने जा रही है। 1 जून से देश में ऐसे नए नियम लागू होंगे, जिनके तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अकाउंट बनाना आसान नहीं रहेगा। सरकार का कहना है कि कम उम्र के बच्चों को इंटरनेट पर मौजूद खतरनाक और नुकसानदायक कंटेंट से बचाने के लिए यह फैसला लिया गया है।

मलेशिया के कम्युनिकेशंस एंड मल्टीमीडिया कमीशन (MCMC) के अनुसार नए नियमों को लागू करवाने की जिम्मेदारी सीधे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर डाली जाएगी। यानी अब कंपनियों को खुद यह सुनिश्चित करना होगा कि कम उम्र के बच्चे आसानी से सोशल मीडिया अकाउंट न बना सकें।

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सोशल मीडिया कंपनियों पर बढ़ेगी जिम्मेदारी

नए नियमों के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को अपने कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम को और मजबूत करना होगा। साथ ही यूजर्स की शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई करनी होगी और विज्ञापन देने वालों की पहचान की भी ठीक तरह से जांच करनी पड़ेगी।

सरकार ने यह भी साफ किया है कि अगर किसी कंटेंट में बदलाव, एडिटिंग या छेड़छाड़ की गई है तो उसे स्पष्ट रूप से लेबल करना जरूरी होगा। हालांकि कंपनियों को इन नियमों को लागू करने के लिए कुछ समय की छूट दी जाएगी, लेकिन यह राहत कितने समय तक मिलेगी, इसकी अवधि अभी तय नहीं की गई है।

ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर बुलिंग बने चिंता की वजह

पिछले कुछ वर्षों में मलेशिया में ऑनलाइन फ्रॉड, साइबर बुलिंग और बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इसी वजह से सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सख्त निगरानी बढ़ाने की तैयारी कर रही है।

सरकार जिन खतरों को लेकर सबसे ज्यादा चिंतित है उनमें ऑनलाइन जुआ, स्कैम, बच्चों का शोषण, साइबर बुलिंग और धर्म या नस्ल से जुड़ा भड़काऊ कंटेंट शामिल हैं। अधिकारियों का मानना है कि कम उम्र के बच्चों को ऐसे कंटेंट से दूर रखना अब बेहद जरूरी हो गया है।

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जल्द लागू हो सकता है एज वेरिफिकेशन सिस्टम

मलेशिया सरकार इस साल एज वेरिफिकेशन सिस्टम शुरू करने की भी तैयारी कर रही है। इसके तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स की उम्र की पुष्टि करनी पड़ सकती है। हालांकि यही सबसे बड़ी चुनौती भी मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कंपनियां पहचान पत्र मांगती हैं तो इससे लोगों की प्राइवेसी पर असर पड़ सकता है। वहीं दूसरी ओर थर्ड-पार्टी एज वेरिफिकेशन टूल्स की सटीकता को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। अब यह देखना अहम होगा कि सरकार सुरक्षा और प्राइवेसी के बीच संतुलन कैसे बनाती है।

दुनिया के कई देशों में बढ़ रही सख्ती

मलेशिया अकेला ऐसा देश नहीं है जो बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सख्ती कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया ने 2024 में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर लगभग पूरी तरह रोक लगाने वाला कानून पास किया था।

इसके अलावा फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका के कई राज्यों में भी इसी तरह के नियम लागू किए जा चुके हैं। भारत में भी गोवा सरकार ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने का आदेश दिया है।

बड़ी टेक कंपनियों पर पड़ेगा असर

नए नियमों का असर Meta, TikTok, YouTube और X जैसी बड़ी टेक कंपनियों पर भी पड़ सकता है। इन कंपनियों को अब मलेशिया में अपने सिस्टम और नीतियों में बदलाव करने पड़ सकते हैं।

दक्षिण-पूर्व एशिया में बड़ी संख्या में युवा इंटरनेट यूजर्स मौजूद हैं, इसलिए यह इलाका टेक कंपनियों के लिए बेहद अहम माना जाता है। लेकिन अब बढ़ते सरकारी नियम और सख्ती इन कंपनियों के सामने नई चुनौती बनकर उभर रहे हैं।

Location :  New Delhi

Published :  23 May 2026, 2:47 PM IST

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