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स्क्रीन के पार सुरक्षित बचपन (Img- Pinterest)
New Delhi: आज के दौर में स्मार्टफोन बच्चों की पढ़ाई से लेकर मनोरंजन तक का मुख्य जरिया बन चुका है। ऑनलाइन क्लासेज, गेमिंग और यूट्यूब के इस युग में बच्चों को मोबाइल से पूरी तरह दूर रखना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
हालांकि, इंटरनेट की असीमित दुनिया में अच्छे कंटेंट के साथ-साथ भ्रामक और अश्लील सामग्री का जोखिम भी बना रहता है। ऐसे में माता-पिता के लिए यह जानना जरूरी हो गया है कि उनका बच्चा डिजिटल स्पेस में क्या कर रहा है और उसे सुरक्षित कैसे रखा जाए।
बच्चों को स्मार्टफोन की लत से बचाने और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एंड्रॉइड में 'Google Family Link' और आईफोन में 'Screen Time' फीचर दिए गए हैं। इनकी मदद से पेरेंट्स यह तय कर सकते हैं कि बच्चा कौन सा ऐप कितनी देर चला सकता है।
इसके अलावा, ऐप स्टोर और प्ले स्टोर पर प्रतिबंध लगाकर बिना आपकी अनुमति के किसी भी नए ऐप को डाउनलोड या इन-ऐप खरीदारी करने से पूरी तरह रोका जा सकता है।
यूट्यूब बच्चों के बीच मनोरंजन का सबसे लोकप्रिय माध्यम है, लेकिन वहां अनुचित कंटेंट से बचाव के लिए सेटिंग्स में जाकर 'Restricted Mode' ऑन करना बेहद कारगर साबित होता है।
इसी तरह, गूगल क्रोम या सर्च इंजन में 'SafeSearch' विकल्प को सक्रिय करने से इंटरनेट पर मौजूद अनुचित तस्वीरें और वेबसाइट्स सर्च रिजल्ट में नहीं दिखाई देती हैं। ये तकनीकी फिल्टर बच्चों के लिए इंटरनेट को काफी हद तक सुरक्षित बना देते हैं।
हालांकि, ये डिजिटल सेटिंग्स बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने में सुरक्षा कवच की तरह काम करती हैं, लेकिन सिर्फ तकनीक पर निर्भर रहना काफी नहीं है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों के साथ खुला संवाद बनाए रखें।
उन्हें इंटरनेट के सही और गलत इस्तेमाल के अंतर के बारे में समझाएं। सेटिंग्स के जरिए निगरानी रखने के साथ-साथ अगर बच्चों के साथ रोजाना कुछ समय बिताया जाए, तो उनकी डिजिटल आदतें हमेशा संतुलित और सुरक्षित रहेंगी।
Location : New Delhi
Published : 23 August 2026, 1:20 PM IST
Topics : Parental Control Screen Time tech news tech tips