Karnatka MLA Shocking Statement: क्या पुरुषों को भी मिलनी चाहिए मुफ्त शराब? विधायक एमटी कृष्णप्पा का चौंकाने वाला बयान

डीएन ब्यूरो

बेंगलुरु के विधायक एमटी कृष्णप्पा का चौंकाने वाला गयान सामने आया है । जिसमें उन्होंने एक विवादित बयान दिया है। जिससे हडकंप मच गया है । पढ़िए डाइनामाइट न्यूज की रिपोर्ट

शराब वितरण की अपील पर गरमाई चर्चा
शराब वितरण की अपील पर गरमाई चर्चा


बेंगलुरु: कर्नाटक विधानसभा में जनता दल (सेक्युलर) के विधायक एमटी कृष्णप्पा ने हाल ही में एक विवादित मांग उठाई, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। उन्होंने विधानसभा में कहा कि जब सरकार महिलाओं को विभिन्न मुफ्त योजनाओं के तहत लाभ दे रही है, तो पुरुषों को भी हर हफ्ते दो बोतल मुफ्त शराब मिलनी चाहिए। उनका यह बयान बुधवार को सदन में चर्चा के दौरान आया और इसके बाद चारों तरफ चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।

एमटी कृष्णप्पा ने रखी अपनी बात 

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डाइनामाइट न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक,  एमटी कृष्णप्पा ने अपनी बात रखते हुए कहा, "अध्यक्ष महोदय, कृपया मुझे गलत न समझें, लेकिन जब सरकार महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए 2000 रुपये मुफ्त देती है या मुफ्त बिजली सुविधा देती है, तो यह हमारा पैसा है। इस व्यवस्था में पुरुषों को भी शामिल किया जाना चाहिए।" उन्होंने तर्क दिया कि अगर सरकार ऐसे प्रयोग कर सकती है, तो पुरुषों को भी हर हफ्ते दो बोतल शराब मुफ्त देना गलत नहीं होगा। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सहकारी समिति के माध्यम से इसे लागू किया जा सकता है और इस बारे में मंत्री जॉर्ज से बात की जा सकती है।

डाइनामाइट न्यूज संवाददाता के मुताबिक विधायक के बयान पर सदन में चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता केजे जॉर्ज ने चुटकी लेते हुए कहा, "आप चुनाव जीतिए, सरकार बनाइए और कीजिए।" इस पर कृष्णप्पा ने जवाब दिया, "आपने गारंटी तो दे दी है न?" जॉर्ज ने फिर स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी शराब की खपत कम करने के लिए काम कर रही है। उद्योग मंत्री यूटी खादर ने भी इस पर अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा कि अगर सरकार हर व्यक्ति को दो बोतल शराब मुफ्त देने की योजना शुरू करती है तो इससे स्थिति और भी जटिल हो सकती है। उनके अनुसार यह मांग समझ से परे है।

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जब कृष्णप्पा ने कहा कि अगर यह योजना मुफ्त दी जाए तो स्थिति अपने आप सुधर जाएगी तो सदन में हल्की चर्चा शुरू हो गई। एमटी कृष्णप्पा के इस बयान के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों और आम जनता की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ नेता उनकी मांग की आलोचना कर रहे हैं तो कई इस बात पर बहस कर रहे हैं कि क्या इस तरह से सरकारी पैसे का इस्तेमाल करना सही है। इस घटना ने कर्नाटक की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है और आने वाले दिनों में इस पर और भी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं। यह घटना बताती है कि राजनीतिक रुझानों और सामाजिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है।










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