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नई दिल्लीः शिक्षण संस्थानों में प्रवेश और सरकारी नौकरियों में भर्ती के लिए होने वाली तमाम प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र लीक होने के मामले लगातार सामने आते रहते हैं। सख्त कानून और प्रावधानों के बाद भी पेपर लीक के मामले थमते नहीं दिख रहे हैं।
हाल के दिनों में नीट यूजी, यूपीपीएसी, बीपीएससी, यूपी पुलिस कांस्टेबल परीक्षा समेत कई परीक्षाओं के पेपर लीक होने के मामले राष्ट्रीय स्तर पर छाये रहे। पेपर लीक का मामला अब बड़े स्तर और अगले चरण तक पहुंच गया है।
डाइनामाइट न्यूज़ के संवाददाता के अनुसार, पेपर लीक केवल भर्ती और शिक्षण संस्थानों में प्रवेश पाने तक सीमित नहीं रहा। इसने बड़ा रूप ले लिया है। सरकारी विभागों के इंटरनल डिपार्टमेंटल एग्जाम के पेपर भी लीक होने लगे है।
ऐसा ही एक बड़ा मामला सामने आया है, जो देश के सबसे बड़े रोजगार और सेवा प्रदाता रेलवे से जुड़ा है। इस्ट-सेंट्रल जोन की डीडीयू रेलवे डिविजन से जुड़ा हुआ है। डीडीयू रेलवे डिविजन में चीफ लोको इंस्पेक्टर के पदों के लिये 4 मार्च को विभागीय परीक्षा होनी थी। लेकिन परीक्षा होने से पहले ही इसका पेपर लीक हो गया। परीक्षा की पूर्व संध्या पर यानी 3 मार्च की शाम को एक सूचना के आधार पर सीबीआई की तीन टीमों ने बेगुसराय में कुछ ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की।
17 लोको पायलट समेत 27 गिरफ्तार
इस छापेमारी के दौरान 17 ऐसे लोगों को पकड़ा गया, जिनके पास से परीक्षा के लिये सेट किये गये प्रश्न पत्र की हाथ से लिखी कॉपी यानी पेपर बरामद किये गये। सीबीआई ने 1 करोड़ 17 लाख रूपये की नकदी भी बरामद की। ये नकदी पेपर खरीदने के एवज में दी गई थी। सीबीआई ने 17 लोको पायलट समेत कुल 26 अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। रेलवे के कई अधिकारी सीबीआई के रडार पर हैं। मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
आरोपियों के खिलाफ विभागीय एक्शन शुरु कर दिया गया है। इस मामले में रेलवे के कई अधिकारी और कर्मचारी सस्पेंड हो सकते हैं। मामले की जांच जारी है।
किसने किया पेपर लीक
अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर ये प्रश्नपत्र किसने लीक किये और कैसे लीक हुए। इस सवाल के जवाब में सीबीआई के हवाले से जो जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक पेपर सेट करने वालों ने ही पेपर को हाथ से लिखा और उसकी फोटो कॉपी करवाकर पेपर देने वालों को बेच दी। इसके ऐवज में मोटा पैसा लिया गया।
'लोक परीक्षा कानून 2024'
सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने पर 3 से 5 साल की सजा और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है. संगठित रूप से इस तरह का अपराध करने पर एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
अब देखना होगा कि रेलवे की विभागीय परीक्षा का पेपर लीक करने वालों के खिलाफ कब तक शिकंजा कसा जायेगा।
Published : 5 March 2025, 7:02 PM IST
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