DN Exclusive: महराजगंज में पुलिसिया तांडव ने ब्रिटिश अत्याचार को छोड़ा पीछे, 250 ग्रामीणों पर फर्जी मुकदमा, वर्दी के खौफ से दहशत में आये गांव वाले पलायन को हुए मजबूर

शिवेन्द्र चतुर्वेदी/अरुण गौतम/कार्तिकेय पांडेय

महराजगंज जिले के सदर कोतवाली थाना क्षेत्र के पिपरा रसूलपुर गांव में कल जो कुछ हुआ उसने अंग्रेजी हुकुमत की यादें ताजा कर दी हैं। पहले तो एक वर्दीधारी दरोगा ने न्यायालयों और मानवाधिकार आयोग के आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए बीच सड़क पर एक गरीब, बेबस, लाचार बुजुर्ग को अवैध वसूली के चक्कर में लाठियों से पीट-पीटकर अधमरा कर दिया, फिर जब महिलाओं और ग्रामीणों ने विरोध किया तो उन्हीं के खिलाफ एकतरफा गंभीरतम धाराओं में फर्जी मुकदमा दर्ज कर उन्हें खौफजदा कर दिया। आरोपी दरोगा के खिलाफ कोई कार्रवाई नही की गयी। इससे ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा है। डाइनामाइट न्यूज़ के खोजी संवाददाताओं की एक्लक्लूसिव रिपोर्ट..


महराजगंज: लगता है जिले के बड़े अफसरों को किसी का खौफ नही है। कुर्सी मिली है तो जमकर मनमर्जी करो। न इन्हें संविधान से डर लगता है, न सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट से, न मानवाधिकार आयोग से और न ही शासन या सीबीआई की किसी बड़ी जांच से। मामले को अपनी मनमर्जी से तोड़ो-मरोड़ो और जब कोई विरोध करे तो उन्हें सरकारी काम में बाधा पहुंचाने का आरोपी बना खौफजदा कर दो। 

पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते आक्रोशित ग्रामीण

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सदर कोतवाली थाना क्षेत्र में पिछले 40 दिनों में एक के बाद एक तीन बड़ी घटनायें घटती हैं और सभी में सरकारी झूठ का मुलम्मा ओढ़ा कर लीपा-पोती कर दी जाती है। इसी के दम पर लखनऊ और दिल्ली में बैठे बड़े अफसरों को साफ गुमराह कर दिया जाता है.. जैसे कुछ हुआ ही नही.. और यदि कुछ हुआ भी तो वर्दीधारी नही एकतरफा आम गरीब, निरीह जनता दोषी है।

22 मार्च को कोतवाली पुलिस के मनबढ़ सिपाही बस स्टेशन के पास सेना के जवान को अकारण पीटते हैं.. सड़क पर जनाक्रोश और जाम के बाद लीपा-पोती कर दी गयी.. मानो कुछ हुआ ही नही। 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के दिन अमरुतिया के केवटहिया टोला में लोकसभा चुनाव में एक वर्ग विशेष की भावनाओं को आहत करने की नापाक मंशा से अराजक तत्वों ने डा. अंबेडकर की मूर्ति को खंड-खंड कर डाला.. भारी बवाल के बाद भी इस गंभीर मामले में आज तक कोई गिरफ्तारी नही। 

गरीब, बेबस, लाचार, पीड़ि‍त बुजुर्ग ओमप्रकाश मौर्य

अब तारीख आती है 2 मई की। सदर कोतवाली थाना क्षेत्र के पिपरा रसूलपुर गांव में सुबह सवेरे करीब 9 बजे एक निरीह, लाचार, गरीब, बेबस, बूढ़ा ओमप्रकाश मौर्य अपने बच्चों व परिवार के दो जून की रोटी के लिये जंगल से अपनी टूटी साईकिल पर जलौनी की थोड़ी सी छोटी-छोटी टहनियां बटोरकर ला रहा होता है तभी आईटीएम चौकी इंचार्ज श्रवण शुक्ला की काली निगाह इस बेबस पर पड़ जाती है। पहले तो उससे अवैध वसूली की कोशिश होती है जब बेबस बुजुर्ग मना करता है तो सरेआम मानवाधिकार आय़ोग और न्यायालयों के दिशा-निर्देशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए यह चौकी इंचार्ज अपने साथी सिपाही के साथ बेबस बुजुर्ग पर लाठियां लेकर टूट पड़ता है। 

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संविधान की शपथ लेकर जिले में डीएम और एसपी की कुर्सी पर बैठे इन दोनों बड़े अफसरों ने इतनी भी जहमत नही उठायी कि ये इस आरोपी दरोगा से इतना भी पूछ सकें कि उसने बीच सड़क पर लाठियों से एक बेबस को क्यों पीटा? क्यों सरे राह एक वरिष्ठ नागरिक के मूल अधिकारों को चोट पहुंचायी गयी? संविधान के किताब के किस पन्ने पर एक वर्दीधारी को यह इजाजत दी गयी है कि वह किसी नागरिक को बीच सड़क पर लाठियों से पीटेगा?

इन्‍हीं लकड़ियों के लिए चौकी इंचार्ज ने वृद्ध की थी पिटाई  

जैसे ही इस पुलिसिया अत्याचार की जानकारी गांव के प्रधान से लेकर आम महिलाओं, परिजनों व ग्रामीणों को हुई तो इन सबने इसका पुरजोर विरोध किया और महिलाओं ने झाड़ू लेकर इस मनबढ़ चौकी इंचार्ज को दौड़ा लिया। ग्रामीणों ने भारी विरोध करते हुए महराजगंज-फरेन्दा मुख्य मार्ग को जाम कर दिया और चौकी प्रभारी व इसके साथी सिपाही के खिलाफ कार्यवाही की मांग करने लगे।

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थोड़ी देर बाद मौके पर पहुंचे एसडीएम सदर सत्यम मिश्र व सीओ सदर देवेन्द्र कुमार की हालत पतली हो गयी। उन्हें समझ में ही नहीं आ रहा था कि कैसे आक्रोशित ग्रामीणों के गुस्से को काबू में कर जाम खुलवायें। काफी मान-मनौव्वल और चौकी प्रभारी के खिलाफ कड़ी कार्यवाही के आश्वासन के बाद जाम खुला।

इसके बाद पुलिसिया जुल्म की नयी पटकथा महराजगंज में बैठकर लिखने की तैयारी शुरु हो गयी। ग्रामीणों का आरोप है कि एसडीएम सदर सत्यम मिश्र व सीओ सदर देवेन्द्र कुमार ने असंवेदनशीलता की सारी पराकाष्ठा पार कर दिया। पुलिसिया पिटाई और जुल्म के शिकार हुए बेबस 55 वर्षीय ओमप्रकाश मौर्य को डाक्टरी मोलाहिजा के नाम पर महराजगंज जिला अस्पताल लाया गया फिर इन अफसरों ने मोलाहिजा कराने की बजाय बेसहारा छोड़ उसे उसके हाल पर छोड़ भाग खड़े हुए। इसके बाद अवैध वसूली की बात को छिपाने के लिए 4 महिलाओं सहित 11 नामजद व 250 अज्ञात के खिलाफ गंभीरतम धाराओं में मनगढ़ंत मुकदमा प्रभारी कोतवाल गौतम सिंह की ओर से दर्ज करवा दिया गया।

मामले की जानकारी देते गांव वाले

इस एकतरफा कार्यवाही की जानकारी जब ग्रामीणों को हुई तो उनका गुस्सा पुलिस पर फूट पड़ा। डाइनामाइट न्यूज़ की टीम ने गांव में पहुंचकर जब ताजा हालात का जायजा लिया तो पता चला कि पीड़ित की पत्नी व परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है (देखें वीडियो), इन सभी ने एक-एक कर पुलिसिया तांडव की अंतहीन कथा और अपनी पीडा़ बतायी। मनगढ़ंत, झूठा व एकतरफा मुकदमा दर्ज होने के बाद गांव के लोग पुलिसिया खौफ से खौफजदा हैं। गांव के लोग डरे-सहमे हैं तथा छिपने व पलायन को मजबूर हैं। इनका कहना है कि न जाने कब रात के अंधेरे में पुलिसिया तांडव शुरु हो जाये और महिलाओं व पुरुषों को पुलिस जेल की सलाखों के पीछे अपनी काली-करतूत को छिपाने के लिए डाल दे। 

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बताया जा रहा है कि पिछले दो साल से सदर कोतवाली पुलिस का तांडव चरम पर है। इसकी वजह है यहां के थानेदार रामदवन मौर्य। एक के बाद एक बड़ी घटनाओं और शिकायतों के बावजूद जिले के बड़े अफसरों ने दो साल से अधिक समय से लगातार एक ही कुर्सी पर इसे तैनाती दे रखी है। आये दिन कोतवाली क्षेत्र में एक के बाद एक बड़ी घटना घट रही है औऱ अधिकांश के पीछे जनता से अवैध वसूली की शिकायतें निकलकर आ रही हैं। इस मामले का आरोपी दरोगा श्रवण शुक्ला शहर कोतवाल का बेहद खास है। आम चर्चा है कि जिले के सबसे विवादित थानेदार रामदवन मौर्य के ऊपर नगर के एक जनप्रतिनिधि का हाथ है इसी वजह से जिले के बड़े अफसर इस कोतवाल पर हाथ डालने की हिम्मत नही जुटा पा रहे हैं। 

चौकी इंचार्ज की काली करतूतों के बारे में बताते ग्राम प्रधान 

सबसे बड़ा सवाल ये है कि जब ग्रामीणों ने इस पुलिसिया अत्याचार के खिलाफ अपनी तहरीर दी तो उसे कोतवाली पुलिस ने रद्दी की टोकरी में फेंक दिया। न कोई डाक्टरी-मोलाहिजा, न अवैध वसूली व पिटाई का मुकदमा। अब बड़ा सवाल यह कि यदि न्यायालय व मानवाधिकार आय़ोग की चौखट पर यह मामला उठा तो जिले के जिम्मेदार डीएम-एसपी क्या कह अपना दामन बचायेंगे? 

आश्चर्य की बात ये है कि इस सम्पूर्ण मामले पर जिला प्रशासन या पुलिस प्रशासन का कोई भी जिम्मेदार अफसर कुछ भी बोलने को तैयार नही है.. मानो वह यह संदेश देना चाहता हो जैसे कहीं कुछ हुआ ही नही है।

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