अद्भुतःभोपाल सेंट्रल जेल में जब RJ बन कैदी गुनगुनाते हैं गीत,ऐसा होता है समां..

भोपाल सेंट्रल जेल इन दिनों काफी चर्चा में है। आखिर हो भी क्यों ना यहां पर बंद कैदी जेलवाणी जो चला रहे हैं। जी हां सेंट्रल जेल के कैदी अब बन गए हैं रेडियो जॉकी, वो कैसे तो इसके लिये पढ़िये डाइनामाइट न्यूज़ की यह खास रिपोर्ट

Updated : 21 October 2018, 4:45 PM IST
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भोपालः कैदियों और जेल का नाम लेते ही जहां दिमाग में इनको लेकर बुरे ख्याल आने लगते हैं वहीं जेल में बंद कैदियों के कुछ ऐसे अच्छे काम भी होते हैं जो इन जेलों में बंद कैदियों को रास्ता दिखाते हैं। ऐसा ही इन दिनों हो रहा है भोपाल की सेंट्रल जेल में।     

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जेलवाणी कैदियों का कर रहा मनोरंजन

 

यहां पर कैदियों के लिये जेलवाणी के नाम से एफएम रेडियो स्टेशन चलाया गया है। हर रोज दोपहर के दो बजते ही सेंट्रल जेल में एक मधुर आवाज सुनाई देती जो इस तरह से है 'ये जेलवाणी है,अब आप सुनिये फरमाइशी गीतों का कार्यक्रम... जब यह आवाज कैदियों के कानों में सुनाई पड़ती है तो सभी कुछ समय के लिये एक अलग ही दुनिया में खो जाते हैं।         

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भोपाल सेंट्रल जेल मध्य प्रदेश (फाइल फोटो)

 

जेलवाणी एफएम रेडियो से किस तरह कैदियों का होता है मनोरंजन  

1. जेलवाणी एफएम रेडियो भोपाल की केंद्रीय जेल में कैदियों के लिये बनाया गया एफएम रेडियो है। यह पूरी तरह से कैदियों को ही समर्पित है। इसका संचालन भी खुद कैदी करते हैं।

2. इस रेडियो की खासियत यह है कि इसके आरजे और प्रोड्यूसर से लेकर एफएम रेडियों में गीतों की फरमाइश करने वाले सभी कैदी ही है।   

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रेडियो कैदियों के लिये बना एक मिशन 

 

3. कैदियों को रेडियो स्टेशन ऑपरेट करने के लिये पूरी ट्रेनिंग दी जाती है। साथ ही हर रोज दिन में 2 से लेकर 4 बजे तक इस रेडियो में कैदियों के फरमाइशी गाने बजते हैं। कैदी अपनी फरमाइशों को चिट्ठी के जरिये संदेश भेजकर देते हैं, इस दौरान उनके मनपंसद गीतों को जेलवाणी में सुनाया जाता है।

4. केंद्रीय जेल में लगभग 3 हजार कैदी हैं, जब सबके कानों में रेडियो की धुन सुनाई पड़ती है तो कुछ देर के लिये सभी भावविभोर हो जाते हैं। यहीं नहीं इस दौरान कैदियों को जेल के सारे कायदे-कानून और समाज की बेहतरी के लिये कई चीजें बताई जाती है।      

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रेडियो स्टेशन (प्रतीकात्मक तस्वीर)

 

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5. केंद्रीय जेल के जेलर पीडी श्रीवास्तव बताते हैं कि जेलवाणी एफएम रेडियो से कैदियों के बीच कम्युनिकेशन गैप की खाई कम हो रही है। इस दौरान कैदियों को दिनचर्या से जुड़ी तमाम चीजें बताई जाती है। रेडियो कैदियों का न सिर्फ मंनोरजन कर रहा है बल्कि रेडियो को संचालित करने से लेकर सबकुछ कुछ कैदी खुद इसे संभालते हैं। यह कैदियों के विकास के लिये बहुत बढ़िया है।
 

Published : 
  • 21 October 2018, 4:45 PM IST

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