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महराजगंज: दो महीने पहले हुए जितेन्द्र यादव पर जानलेवा हमले में यदि पुलिस के बड़े अफसरों ने निष्पक्ष कार्यवाही की होती तो आज शायद जितेन्द्र यादव जिंदा होता।

हत्या के तुरंत बाद मृतक की पत्नी की तरफ से दो पन्ने की तहरीर दी गयी थी लेकिन इस पर न जाने क्यों पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। रहस्यमय परिस्थियों में दूसरी तहरीर पर एफआईआर दर्ज की जाती है। जब यह बात सामने आती है तो परिजन व ग्रामीण पहली तहरीर के मुताबिक विधायक का नाम न देख भड़क उठे।
अब डैमेज कंट्रोल में जुटे पुलिस अफसर कह रहे हैं कि हम विवेचना के क्रम में नाम जोड़ेंगे लेकिन इससे परिजन संतुष्ट नहीं है। इनका कहना है कि एफआईआर में साफ-साफ नाम अंकिन हो न कि विवेचना में बढ़ाया जाय।
मृतक के परिजनों ने डाइनामाइट न्यूज़ से कहा कि अब तक जिला पुलिस के सबसे बड़े अफसर नहीं आये हैं। आखिर वे यहां आकर क्यों नहीं हमसे बात कर रहे हैं?
Published : 11 December 2019, 1:40 PM IST
Topics : Jitendra Yadav Maharajganj Murder Case uttar pradesh उत्तर प्रदेश जितेन्द्र यादव हत्याकांड फरेन्दा थाना क्षेत्र महराजगंज