DN Exclusive: दवाओं पर पाबंदी से देश का फार्मा बाजार पड़ा बीमार

डीएन ब्यूरो

फिक्स डोज कॉम्बिनेशन दवाइयों पर लगी पाबंदी से अब कोई भी मरीज बिना डॉक्टरी पर्ची के केमिस्ट से ऐसी दवाइयों को ले नहीं पाएगा। लेकिन सवाल ये खड़ा हो रहा है कि सरकार ने जिन दवाइयों पर पाबंदी लगाई है इससे मार्केट को कितना नुकसान पहुंचेगा। डाइनामाइट न्यूज़ की स्पेशल रिपोर्ट

फाइल फोटो
फाइल फोटो

नई दिल्लीः अब तक लोग बिना किसी डॉक्टरी सलाह के सर्दी-जुकाम, बुखार व पेट दर्द होने पर खुद ही डॉक्टर बन जाते थे। वहीं केमिस्ट भी ऐसे लोगों को बिना डॉक्टरी पर्चे के ही दवाइयां पकड़ा देते थे। अब ऐसी दवाइयों पर केंद्र सरकार ने तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। ऐसी 328 फिक्स डोज कॉम्बिनेशन(एफडीसी) दवाओं की 6 हजार ब्रांड है जिन पर अब पाबंदी लग गई है।  

यह भी पढ़ेंः OMG! महिला ने 4 बच्चों को दिया जन्म, सुनकर रह गए ना दंग

इन दवाओं पर लगी रोक 

ऐसे दवाइयों में पेन किलर, सेरिडॉन, डायबटीज व दिल के रोगों से संबंधित दवाइयां, विक्स एक्शन 500, कोरेक्स, सूमो, जिंटाप व सूमो समेत 5 हजार ऐसी दवाइयां है जिन्हें बनाने और इनकी बिक्री पर पाबंधी लगाई गई है। 

फाइल फोटो

दवा कंपनियों को लगा झटका

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के इस निर्णय से अब ऐसी दवा कंपनियों को बड़ा झटका लगा है जो अब तक इ दवाइयों का निर्माण करते हुई आ रही थी। अब इन्हें तभी बेचा जाएगा जब डॉक्टर इसकी सलाह देंगे। वहीं मरीजों को बिना पर्चे के ऐसे दवाइयां नहीं दी जाएंगी। 

यह भी पढ़ेंः DN Exclusive: योगी के यूपी में कुपोषण का शिकार क्यों बन रहे हैं नौनिहाल?    

भारत से पहले इन देशों में ये दवाइयां है प्रतिबंधित

भारत ने जहां अब इस पर रोक लगाई है वहीं जर्मनी, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका व फ्रांस समेत कई ऐसे देश हैं जहां पर इन्हें पहले ही प्रतिबंधित किया जा चुका है।

अचानक लगी रोक से 20 हजार करोड़ का नुकसान

अब ऐसी दवाएं प्रतिबंधित होने से करीब 20 हजार करोड़ नुकसान की संभावना जताई जा रही है। बात अगर यूपी की थोक दुकानों और 1.25 लाख फुटकर और थोक दुकानों की करें तो देश के कुल दवा व्यापार में प्रदेश का 18 फिसदी हिस्सा है। 

फाइल फोटो

केमिस्ट एसोसिएशन का कहना है कि इन दवाओं पर लगी पाबंदी से बहुत नुकसान हो रहा है क्योंकि प्रदेश के मेडिकल स्टोर व थोक दवा की दुकानों में इन दवाओं का स्टॉक भरा पड़ा है।  

यह भी पढ़ेंः हैरान करने वाली खबर: मां का दूध नवजात बच्चे के लिए बना जहर..

अगर इन्हें बनाने वाली संबंधित कंपनियों ने ये दवाएं वापस नहीं ली तो दुकानदारों को भारी नुकसान होगा। केमिस्ट एसोसिएशन के प्रवक्ता विकास रस्तोगी की मानें तो इससे मरीजों की भी जेब खाली होगी क्योंकि उन्हें अब अलग- अलग बीमारियों के लिए अलग- अलग दवाइयां खरीदनी पड़ेगी।
 

(डाइनामाइट न्यूज़ के ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)









आपकी राय

#DNPoll:क्या आप एग्जिट पोल पर भरोसा करते हैं?

हां
46.15%
नहीं
53.85%