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मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक बाजारों के साथ भारतीय शेयर बाजार पर भी दिख सकता है। गिफ्ट निफ्टी में भारी गिरावट के संकेत मिल रहे हैं, जिससे सोमवार को बाजार कमजोर खुलने की आशंका है। वहीं कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है।
गिफ्ट निफ्टी में तेज गिरावट (Image Source: Internet)
New Delhi: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को एक बार फिर गिरावट देखने को मिल सकती है। पिछले सप्ताह शुक्रवार को उतार-चढ़ाव वाले ट्रेडिंग सत्र के दौरान भारतीय इक्विटी बाजार में कमजोरी दर्ज की गई थी। अब मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण बाजार पर दबाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
ग्लोबल संकेतों के अनुसार गिफ्ट निफ्टी में सुबह साढ़े सात बजे करीब 765.50 अंकों यानी 3.11 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह 23,810.50 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। इससे यह संकेत मिल रहा है कि सोमवार को भारतीय शेयर बाजार कमजोर शुरुआत कर सकता है।
निवेशकों की नजर अब पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रम और उसके वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाले प्रभाव पर टिकी हुई है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक जोखिम से जुड़ी चिंताएं भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका का प्रमुख तेल बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) करीब 24.72 प्रतिशत बढ़कर 113.37 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत भी 22.93 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 113.94 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई।
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तेल की कीमतों में यह तेजी ऐसे समय में आई है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास अनिश्चितता बनी हुई है। यह इलाका वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि भारत सरकार ने फिलहाल भरोसा दिलाया है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों को लेकर उपभोक्ताओं और निवेशकों की चिंता बनी हुई है।
वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता का असर एशियाई बाजारों पर भी देखने को मिला है। सोमवार को शुरुआती कारोबार के दौरान जापान और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई। दरअसल कच्चे तेल की कीमतें लगभग चार साल में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से ऊपर पहुंच गई हैं।
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इससे वैश्विक बाजारों में जोखिम की भावना बढ़ गई है और निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाना शुरू कर दिया है। हालांकि इस बीच घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) भारतीय बाजार में लगातार निवेश कर रहे हैं। फरवरी में निवेश में कुछ कमी आने के बाद हाल के बाजार करेक्शन के दौरान DIIs ने अपनी खरीद बढ़ा दी है।
जानकारी के मुताबिक पिछले आठ ट्रेडिंग सत्रों में म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियों, बैंकों और पेंशन फंड्स जैसे घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 58,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव कम नहीं हुआ तो बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन घरेलू निवेशकों का मजबूत निवेश बाजार को सहारा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।