दूरदर्शन के कैमरामैन की मौत से उठे सवाल, दो महीने में तीन बड़े हादसे, जिम्मेदार मौन

डीएन ब्यूरो

देश के सबसे बड़े न्यूज़ नेटवर्क और जन प्रसारक दूरदर्शन की अजब राम कहानी है। जान की बाजी लगाकर देश की सेवा करने वाले पत्रकारों की जान तक चली जा रही है लेकिन उनके वेलफेयर के लिए केन्द्र सरकार, प्रसार भारती और दूरदर्शन प्रशासन के पास कोई मुकम्मल व्यवस्था नही है। सब कुछ राम भरोसे.. इससे यहां के पत्रकारों में जबरदस्त रोष व्याप्त है। डाइनामाइट न्यूज़ एक्सक्लूसिव..

दिवंगत कैमरामैन अच्युतानंद साहू (सबसे बाएं), बाल-बाल बचे मोर मुकुट शर्मा (बीच में) व धीरज कुमार (सबसे दाएं)
दिवंगत कैमरामैन अच्युतानंद साहू (सबसे बाएं), बाल-बाल बचे मोर मुकुट शर्मा (बीच में) व धीरज कुमार (सबसे दाएं)

नई दिल्ली: जन प्रसारक दूरदर्शन न्यूज़ में चाहे रिपोर्टर हो या फिर कैमरामैन.. सभी अपनी जान पर खेलकर देश के दुर्गम इलाकों में अपने काम को अंजाम देते हैं लेकिन इनकी कोई सुध लेने वाला नही है। पिछले दो महीने में तीन बड़ी दुर्घटनाएं हुईं हैं। 

 

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1.    दिल्ली से कवरेज के लिए झारखंड गयी टीम सड़क दुर्घटना की शिकार, पत्रकार कुमार अनिल घायल


2.    कानपुर में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की कवरेज करने दिल्ली से गये वरिष्ठ पत्रकार राजेश राज और कैमरामैन भीम सिंह सड़क दुर्घटना में बुरी तरह घायल
3.    मंगलवार को छत्तीसगढ़ में नक्सली हमले में कैमरामैन अच्युतानंद साहू शहीद, दो पत्रकार धीरज कुमार और मोर मुकुट शर्मा बाल-बाल बचे

 

शहीद कैमरामैन अच्युतानंद साहू

 

दिखावटी सहानभूति से गहरा आक्रोश
छत्तीसगढ़ की घटना के बाद दूरदर्शन के कर्मचारियों में गहरा आक्रोश है। डीडी न्यूज़ से जुड़े कई पत्रकारों ने डाइनामाइट न्यूज़ को बताया कि यहां सब कुछ राम भरोसे है। घटना घटने के बाद दिखावटी सहानभूति। कोई मुकम्मल व्यवस्था नही कि ड्यूटी पर.. जख्मी होने या शहीद होने पर क्या होगा? मेडिकल क्लेम से लेकर आर्थिक सहायता तक किसी चीज की स्पष्ट नीति नही।

 

 

एसपी ने बताया कैसे बाल-बाल बचे दो पत्रकार
दंतेवाड़ा के एसपी अभिषेक पल्लव ने बताया (देखें वीडियो) कि दंतेवाड़ा जिले के अंतर्गत अरनपुर थाना क्षेत्र में नक्सलियों ने मंगलवार सुबह करीब 11 से 12 बजे के बीच हमला किया इसमें छत्तीसगढ़ पुलिस के एक उपनिरीक्षक रुद्र प्रताप सिंह, एक सहायक आरक्षक मंगलु और दूरदर्शन के कैमरामैन अच्युतानंद साहू शहीद हो गये। जब फायरिंग शुरू हुई तो उन्होंने पुलिस को नहीं बल्कि मीडियाकर्मियों को निशाना बनाया। एक पॉइंट पर आकर उन्होंने मारा और कैमरा ले लिया। दो मीडियाकर्मी धीरज कुमार और मोर मुकुट शर्मा 150 मीटर रेंगते हुए भागे। उनके ऊपर पचास से सौ राउंड फायर किए हैं। यदि कॉन्स्टेबल ने धक्का नहीं दिया होता तो दोनों मीडियाकर्मी मारे गए होते।

 

शहीद कैमरामैन को श्र्द्धांजलि 

 

15 लाख की सहायता व नौकरी की मरहम

जब यह खबर सोशल मीडिया पर फैली कि नक्सली हमले में मीडिया कर्मी शहीद हुआ है और विपक्ष के लोगों ने धड़धड़ ट्विट शुरू किये तब जाकर जागी सरकार ने शहीद मीडियाकर्मी के परिजनों को 15 लाख की सहायता राशि व पत्नी को नौकरी की मरहम लगायी लेकिन शहीद के बच्चों के भविष्य का क्या?

इसका कोई जवाब देने वाला नही..

दो करोड़ की आर्थिक सहायता की मांग
शहीद के साथियों ने मांग की है कि केन्द्र व राज्य सरकार एक-एक करोड़ रुपये सहायता राशि मृतक के परिजनों को दी जाये। 

दिल्ली में शोक सभा गुरुवार को

इधर पत्रकारों ने 1 नवंबर को शाम 4 बजे नई दिल्ली के रायसीना रोड स्थित प्रेस क्लब में एक शोक सभा का आयोजन किया है। जिसमें दिवंगत साहू को श्रद्धांजलि अर्पित की जायेगी।

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