पिथौरागढ़ : तराई के इलाकों में कैसे गुजारा कर रहे यहां के लोग, जानें यहां की अनोखी परंपरा के बारे में

उत्तराखंड के ऊँचे पर्वतीय क्षेत्र मुनस्यारी से तराई के समतल इलाकों तक बकरियों का व्यापार केवल एक कारोबारी काम नहीं, बल्कि परंपरा, संघर्ष और जीवटता की मिसाल है। पढ़िये डाइनामाइट न्यूज़ की पूरी रिपोर्ट

Updated : 15 April 2025, 3:12 PM IST
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पिथौरागढ़ : उत्तराखंड के ऊँचे पर्वतीय क्षेत्र मुनस्यारी से तराई के समतल इलाकों तक बकरियों का व्यापार केवल एक कारोबारी काम नहीं, बल्कि परंपरा, संघर्ष और जीवटता की मिसाल है। आज भी कई पशुपालक और व्यापारी बकरियों के साथ 300 से 400 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा तय करते हैं, जो महीनों चलती है।

डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, इस व्यापार की शुरुआत गर्मियों में होती है जब मुनस्यारी के ऊँचे बुग्यालों (घास के मैदानों) से बकरियों को लेकर व्यापारी नीचे की ओर कूच करते हैं। यात्रा का उद्देश्य होता है—तराई के इलाकों में बकरियाँ बेचकर जीविका कमाना। यह सफर जंगलों, नदियों, घाटियों और दुर्गम पहाड़ियों से गुजरता है।

व्यापारी रास्ते में अस्थायी पड़ाव बनाते हैं, जहां बकरियों को चारा और पानी दिया जाता है। इस दौरान उन्हें जंगली जानवरों, मौसम की मार और रास्ते की कठिनाइयों से भी जूझना पड़ता है।

यह परंपरा न केवल एक जीविका का साधन है, बल्कि उत्तराखंड की ग्रामीण जीवनशैली और जीवटता का भी प्रतीक है। समय के साथ वाहन और सड़कें आने के बावजूद कई लोग अब भी इस पारंपरिक तरीके से व्यापार करना पसंद करते हैं क्योंकि इससे बकरियाँ स्वस्थ रहती हैं और बाजार में अच्छी कीमत मिलती है। यह यात्रा आज भी लोगों के धैर्य, मेहनत और प्रकृति के साथ सामंजस्य की मिसाल बनकर जीवित है।

Published :  15 April 2025, 3:12 PM IST

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