कानपुर में 5600 करोड़ की महाठगी: दुबई से लौटते ही पकड़ा गया मास्टरमाइंड, बैंक अफसर भी जांच के घेरे में

कानपुर में 5600 करोड़ रुपये के कथित अवैध लेनदेन और फर्जीवाड़े के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। मुख्य आरोपी साहजेब वारिस को पकड़ने के लिए पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय जासूसी एजेंसियों की मदद ली और दुबई से हैदराबाद पहुंचते ही उसे गिरफ्तार कर लिया।

Post Published By: Rohit Goyal
Updated : 14 September 2026, 12:19 PM IST
google-preferred

Kanpur: कानपुर में सामने आए 5600 करोड़ रुपये के बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े की जांच में पुलिस लगातार नए खुलासे कर रही है। इस मामले में कमिश्नरेट पुलिस ने मुख्य आरोपी साहजेब वारिस को पकड़ने के लिए विशेष रणनीति तैयार की थी।

बताया जा रहा है कि करीब 5000 पन्नों की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद आरोपी के खिलाफ दो मुकदमे दर्ज किए गए थे। मुकदमा दर्ज होने की जानकारी मिलते ही साहजेब दुबई फरार हो गया था। इसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी कराया।

दो अंतरराष्ट्रीय जासूसी एजेंसियों की मदद से रखी गई नजर

पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दो अंतरराष्ट्रीय स्तर की निजी जासूसी एजेंसियों को भी जांच में शामिल किया। एजेंसियों को साहजेब की तस्वीर, पासपोर्ट विवरण और अन्य जरूरी जानकारियां उपलब्ध कराई गईं।

जांच के मुताबिक, 18 अगस्त को मुकदमा दर्ज होने के बाद साहजेब दुबई चला गया था। कुछ दिनों बाद उसके वापस आने की जानकारी जासूसी एजेंसी को मिली, जिसके बाद पुलिस को अलर्ट किया गया। हालांकि, कार्रवाई से पहले ही आरोपी को इसकी भनक लग गई और वह 25 अगस्त को अपने पांच साथियों के साथ दोबारा दुबई चला गया।

इसके बाद निजी जासूसों ने दुबई में उसकी गतिविधियों पर नजर बनाए रखी। गुरुवार को जैसे ही साहजेब दुबई से हैदराबाद एयरपोर्ट पहुंचा, पुलिस को इसकी सूचना दी गई। एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही पुलिस टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

इखलाख के खातों में आठ दिन में हुआ 180 करोड़ का लेनदेन

5600 करोड़ रुपये के इस मामले में पुलिस जांच के दौरान कई संदिग्ध खातों और लेनदेन की जानकारी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, चकेरी के सनिगवां निवासी इखलाख हुसैन के खाते में वर्ष 2024 में सिर्फ आठ दिनों के भीतर करीब 180 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ था।

इखलाख के बैंक ऑफ बड़ौदा की पटेलनगर शाखा में खाते में करीब 1200 ट्रांजेक्शन हुए थे। बैंक ने संदिग्ध गतिविधियां देखकर इसकी सूचना पुलिस को दी थी। पुलिस ने उस समय इखलाख से पूछताछ की थी, लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया गया था।

पुलिस आयुक्त रघुबीरलाल के मुताबिक, पूछताछ के दौरान इखलाख ने अपनी कुछ फर्जी कंपनियों को कारोबार से जुड़ा बताते हुए खुद को कारोबारी बताया था।

पांच बैंक खातों में मिले 89 करोड़ रुपये, पुलिस ने किया फ्रीज

जांच में इखलाख के कई बैंक खातों की जानकारी मिली है। पुलिस के मुताबिक, एचडीएफसी बैंक में उसके दो खाते, बैंक ऑफ बड़ौदा, एसबीआई और आईसीआईसीआई बैंक में एक-एक खाता मिला है।

इन पांच खातों में करीब 89 करोड़ रुपये पाए गए हैं, जिन्हें पुलिस ने फ्रीज करा दिया है। अब पुलिस इन खातों से जुड़े लेनदेन और अन्य संदिग्ध लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

लोन के बदले रिश्वत लेने के आरोप में बैंक अधिकारी भी जांच के दायरे में

पुलिस जांच में बैंक अधिकारियों की भूमिका भी सामने आ रही है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य मोहम्मद आरिफ ने एसबीआई की फीलखाना शाखा से करीब दो करोड़ रुपये के लोन के लिए आवेदन किया था।

आरोप है कि उस समय बैंक अधिकारी रहे मनीष ने 20 लाख रुपये की रिश्वत लेकर करीब 1.75 करोड़ रुपये का लोन जारी कर दिया। मनीष वर्तमान में हरदोई में तैनात हैं। पुलिस ने संबंधित बैंक को पत्र भेजकर कार्रवाई की सिफारिश की है।

5600 करोड़ के नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी पुलिस

कानपुर पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों, फर्जी कंपनियों, बैंक खातों और अवैध लेनदेन की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस महाठगी में शामिल अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं।

Location :  Kanpur

Published :  14 September 2026, 12:19 PM IST

Related News

Advertisement