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राजन कुमार डोप टेस्ट में फेल पाए गए हैं और NADA ने उन्हें सस्पेंड कर दिया है। उत्तराखंड के इस खिलाड़ी ने घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन ड्रोस्तानोलोन, मेटेनोलोन और क्लोमीफीन के उपयोग के कारण अब उन्हें प्रतियोगिताओं से दूर रहना होगा।
क्रिकेटर डोप टेस्ट में फेल (Img: Internet)
New Delhi: भारतीय क्रिकेट में एक बार फिर डोपिंग का मामला सामने आया है। उत्तराखंड के क्रिकेटर राजन कुमार डोप टेस्ट में फेल पाए गए हैं, जिसके बाद नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (NADA) ने उन्हें सस्पेंड कर दिया है। यह पिछले पांच सालों में पहला मामला है जब किसी भारतीय क्रिकेटर का डोप टेस्ट पॉजिटिव आया है। भारतीय क्रिकेट में ऐसे मामले बहुत कम देखने को मिलते हैं। इससे पहले 2020 में मध्य प्रदेश की अंशुला राव डोपिंग में पॉजिटिव पाई गई थीं और 2019 में पृथ्वी शॉ डोप टेस्ट में फेल हुए थे।
29 साल के राजन कुमार उत्तराखंड की टीम के लिए घरेलू क्रिकेट खेलते हैं। उन्हें ड्रोस्तानोलोन, मेटेनोलोन और क्लोमीफीन का उपयोग करने के लिए दोषी पाया गया है। ये दवाएं महिलाओं में कुछ मेडिकल कंडीशन के इलाज के लिए इस्तेमाल होती हैं, लेकिन कई एथलीट इनका इस्तेमाल टेस्टोस्टेरोन लेवल बढ़ाने के लिए करते हैं।
राजन ने आखिरी बार सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में खेला था। उनका आखिरी मुकाबला 8 दिसंबर, 2025 को दिल्ली के खिलाफ था। कुल करियर में उन्होंने चार फर्स्ट-क्लास मैचों में आठ विकेट, नौ लिस्ट ए मैचों में 14 विकेट और 26 टी20 मैचों में 32 विकेट लिए हैं। इसके अलावा, वह IPL में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर टीम का भी हिस्सा रह चुके हैं।
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राजन कुमार के अलावा कई भारतीय एथलीट डोप टेस्ट में फेल रह चुके हैं। इनमें नोंगमैथम रतनबाला देवी (फुटबॉल), गौरव पटेल (एथलेटिक्स), खुशबू कुमारी (वेटलिफ्टिंग), अचलवीर कडवासरा (बॉक्सिंग) और सिद्धांत शर्मा (पोलो) शामिल हैं। नोंगमैथम रतनबाला देवी के सैंपल में मेटैंडिएनोन पाया गया था।
तमिलनाडु की धाविका धनलक्ष्मी सेकर पिछले साल दूसरी बार डोप टेस्ट में फेल हुईं। उन पर आठ साल का बैन लगा दिया गया, जो 9 सितंबर, 2025 से लागू हुआ। धनलक्ष्मी को पहले 2022 में तीन साल का बैन मिला था। बैन खत्म होने के बाद भी वह फिर से डोप टेस्ट में फेल हो गईं, जिससे उनके करियर पर गंभीर असर पड़ा।
राजन कुमार का मामला भारतीय क्रिकेट में डोपिंग पर नई चेतावनी की तरह देखा जा रहा है। NADA और बीसीसीआई की निगरानी के बावजूद ऐसे मामले सामने आते रहते हैं। इससे खिलाड़ियों और युवा क्रिकेटरों को खेल में ईमानदारी और नियमों का पालन करने की अहमियत को समझना और जरूरी हो गया है।